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कृषि बिल पर केंद्र की मनमानी, किसानों के अस्तित्व को खतरा - ‘आप’

September 21, 2020 11:11 PM

देहरादून: लोकतंत्र के इतिहास में आज रविवार(20 सिंतबर) का दिन काला दिन कहा जाएगा। आम आदमी पार्टी ने भी इस बिल के लोकसभा में पास होने के बाद राज्यसभा में पास करने को लेकर केंद्र सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कृषि बिल को किसानों के लिए काला कानून बताया। ‘आप’ प्रदेश अध्यक्ष एसएस कलेर ने एक बयान जारी करते हुए कहा कि निरंकुश हो चुकी केंद्र सरकार अपनी मनमानी पर उतर आई है। उन्होंने कहा डबल इंजन की सरकार से देश की अर्थव्यवस्था तो संभाली नहीं जा रही और ये देश के अन्नदाता किसानों के हितों के साथ खिलवाड़ करने पर उतारू है। पूर्ण बहुमत की ये सरकार अब निरंकुश तरीके से मनमर्जी पर उतर आया है, जिसका आम आदमी पार्टी पुरजोर तरीके से विरोध करती है और किसानों के हक के लिए उनके साथ खड़ी रहेगी।

इस बिल के विरोधस्वरूप ‘आप’ के कार्यकर्ता 23 सिंतबर को उत्तराखंड विधानसभा का घेराव करेगी, इसके अलावा कलेर ने कहा है कि भाजपा सरकार पूरी तरह से किसान, मजदूर और व्यापारियों की विरोधी है। केंद्र सरकार ने इस काले कानून को दोनों ही सदनों में पास किया है, जिसे ‘आप’ पार्टी के साथ-साथ पूरे देश के किसान, व्यापारी और मजदूर कतई स्वीकार नहीं करेंगे, इनकी दमनकारी नीति अब देश की जनता  समझ चुकी है। वहीं उत्तराखंड के परिपेक्ष में प्रदेश अध्यक्ष ने कहा, उत्तराखंड की जनता भी बीजेपी और कांग्रेस के जनहित की बात वाले जुमलों को समझ चुकी है, और पिछले 20 सालों से इनके विकास के झुनझुने से आजिज़ आ चुकी है। लेकिन समस्याओं का हल उनको नहीं मिला। राज्य में भी सत्तासीन भाजपा सरकार है और केंद्र में भी, फिर भी देश के अन्नदाताओं के खिलाफ बिल लाकर उनको ऊपर उठाने की बजाय उनको कुचलने का प्रयास कर रही है, जिसे कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

‘आप’ प्रदेश अध्यक्ष कलेर ने कहा कि ये बिल पूरी तरह किसान विरोधी और उनके आस्तित्व को कमजोर करने वाला बिल है, इस बिल के जरिए प्रयास किया जा रहा कि किसान के आस्तित्व को खतरा पैदा किया जाए। ये किसानों की ज़मीन और अधिकारों पर केंद्र द्वारा अप्रत्यक्ष हमला है। आम आदमी पार्टी हमेशा ही किसानों की हितेषी रही है।

कलेर ने आश्चर्य जताते हुए कहा कि केंद्रीय कृषि मंत्री को ये नहीं मालूम कि देश के किसानों की औसत आय कितनी है, वो अभी भी सात साल पुराने आंकड़ों में अटके है, वहीं उत्तराखंड राज्य में सदन के पटल पर रखे गए 2017 के आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश के हर किसान पर औसतन 1 लाख 56 हज़ार 888 रुपए का ऋण था, सरकारी आंकड़े ये भी बताते हैं कि 2003 से लेकर2013 तक किसानों पर बकाया कर्ज में बेतहाशा बढ़ोतरी हुई है, ‘आप’ पार्टी सरकार ये सवाल पूछती है कि झूटे आंकड़ों के आधार पर किसानों को कब तक बरगलाया जाएगा, आखिर कब तक किसानों पर दमनकारी नीतियों का सरकार इस्तेमाल करती रहेगी, साथ ही पार्टी ये भी सवाल पूछती है कि अपने झूठ को छुपाने के लिए केंद्र सरकार ने रातों-रात यह बिल क्यों पारित किया? आप पार्टी सरकार ये सवाल पूछती है कि उन छोटे किसानों का क्या होगा, जो दूसरे प्रदेश में अपनी फसल बेचने में सक्षम नहीं है, ऐसे ही कई प्रावधान जो बिल में शामिल हैं और हर तबके के किसान को नज़रअंदाज कर जोड़े गए गए। ‘आप’ पार्टी इसे सीरे से नकारती है और इसका पुरजोर विरोध करती है, और आगे भी किसानों के साथ पार्टी खड़ी रहते हुए उनकी आवाज उठाती रहेगी।

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