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केंद्र दिल्ली कर रही दिल्ली का कूड़ा: दिलीप पाण्डेय

June 13, 2015 12:23 PM

दिल्ली में फैले हुए कूड़े का कारण केंद्र सरकार को बताते हुए दिल्ली प्रदेश संयोजक दिलीप पांडेय ने कहा कि दिल्ली सरकार टैक्स का 10.5 प्रतिशत निगमों को दे रही है। जबकि निगम से 22 हजार ‘घोस्ट’ कर्मचारियों को वेतन जा रहा है। दिल्ली को कूड़ेदान में तब्दील करने की जिम्मेदारी केंद्र की भाजपा सरकार और उसके एमसीडी पर है।

दिलीप ने कहा कि एमसीडी दुनिया की भ्रष्टतम संस्थाओं में से एक है। उसे यह नहीं पता कि ‘घोस्ट’ कर्मचारी कौन हैं? कहां काम कर रहे हैं? इसकी जानकारी किसी को नहीं है। वेतन के नाम पर जाने वाले पैसा भाजपा नेताओं की जेब में जा रहा है। जबकि एमसीडी खुद को कंगाल बता रही है। यह बड़ा घोटाला है। इसकी स्वतंत्र एजेंसी से जांच होनी चाहिए।

पांडेय का कहना है कि हाईकोर्ट के आदेश से पहले ही दिल्ली सरकार ने एमसीडी को 513 करोड़ रुपये मुहैया करा दिए हैं। उन्होंने कहा कि जिस एमसीडी की कंगाली की बात हो रही है, उसको केंद्र सरकार ने दो हजार करोड़ रुपये के बजटीय आवंटन को अभी तक जारी नहीं किया है। इसी के नाम पर सफाई कर्मियों को वेतन नहीं दिया जा रहा है।

दिलीप पांडेय ने आरोप लगाया कि दिल्ली को कूड़ेदान में तब्दील करने की जिम्मेदारी केंद्र की भाजपा सरकार पर है। क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दिल्ली के लिए इनकी कोई नैतिक जिम्मेदारी नहीं बनती? एमसीडी का पैसा कहां जा रहा है? भाजपा को बताना चाहिए कि निगम में सुधार के लिए क्या कदम उठाए गए? शीला सरकार ने भी एमसीडी को 1800 करोड़ रुपये का लोन दिया था। वह पैसा कहां गया? एमसीडी में बगैर रिश्वत के कोई भी काम नहीं होता है?

वहीँ दिल्ली के उपमुख्यमंत्री श्री मनीष सिसोदिया ने ट्रांसफर-पोस्टिंग को लेकर केंद्र व एलजी की दावेदारी के साथ कूड़ा उठवाने की दावेदारी न करने पर उंगली उठाई है। और कहा कि उन्होंने यहां तक कहा, चित भी मेरी, पट भी मेरी, अंटा मेरे बाबा का... निगम के मामले में गृह मंत्रालय यही तो कर रहा है। ट्रांसफर-पोस्टिंग कौन करेगा? एसीबी कौन चलाएगा? ये सब बताने के लिए तो संविधान विशेषज्ञ हैं। लेकिन दिल्ली की सड़कों पर फैला कूड़ा हटवाने के लिए भी कोई संविधान विशेषज्ञ है क्या? संविधान विशेषज्ञ नहीं हैं तो कूड़ा विशेषज्ञ भी चलेगा।

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