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केंद्र सरकार के असहयोग के बावजूद दिल्ली के स्वास्थ्य मॉडल से सुधर रहे है हालात

May 25, 2021 11:53 PM

नई दिल्ली। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल जी बार-बार दोहराते है कि यदि केंद्र सरकार हमें(दिल्ली को) 80 से 90 लाख वैक्सीन हर महीने उपलब्ध करा दें तो हम सभी दिल्लीवासियों को तीन महीनों के अंदर वैक्सीन लगा देंगे। केंद्र सरकार न सिर्फ दिल्ली, बल्कि भारत के अन्य किसी भी राज्य को उनकी मांग के अनुसार वैक्सीन सप्लाई नहीं कर पा रही है। वैक्सीन के अभाव में पूरे देश में हजारों लोग अपनी जान गवा चुके हैं। भारत में बिना केंद्र सरकार की सहायता के सभी को वैक्सीन नहीं लगाई जा सकती है। इसके लिए हमें केंद्र सरकार की वैक्सीन की नीति को समझना पड़ेगा। भारत में इस साल के शुरुआती महीने जनवरी की 16 तारीख को कोरोनावायरस का पहला टीका लगाया गया था। इसमें देशभर के करीब तीन करोड़ हेल्थ वर्कर और फ्रंटलाइन वर्करों को सबसे पहले टीका लगाने की बात कही गई। साथ ही 50 साल से ऊपर के करीब 27 करोड़ लोगों को भी चयनित किया गया था, लेकिन अभी तक यह लक्ष्य भी पूरा नहीं किया जा सका है। इसके 3 दिन बाद ही यानि 19 जनवरी को मोदी सरकार ने अपनी वैक्सीन नीति की प्राथमिकता निर्धारित करते हुए वैक्सीनों को विदेशों में निर्यात करना आरंभ किया। अभी तक मोदी सरकार 93 देशों में 7 करोड़ के करीब वैक्सीन डोज भेज चुकी है। इसमें से 80 देश तो लगभग ऐसे हैं जहां कोरोनावायरस ना के बराबर है।

केंद्रीय मोदी सरकार ने यूएन(सयुक्त राष्ट्र संघ) को बताया कि भारत ने इतनी वैक्सीन अपने लोगों को नहीं लगाई, जितनी उसने दूसरे देशों को निर्यात की है। एक तरफ वैक्सीन एवं ऑक्सीजन के अभाव में भारत में लोग तड़प-तड़प कर मर रहे थे, तो वहीं मोदी सरकार अपनी इमेज मैनेजमेंट पर ध्यान दे रही थी। इस नीति से पूरे 135 करोड़ भारतवासियों के जीवन के अधिकार एवं मूलभूत अधिकारों का उल्लंघन हुआ हैं। जब दिल्ली सरकार ने भारत बायोटेक कंपनी को 1.34 करोड़ वैक्सीन का आर्डर दिया, तो कंपनी ने यह कहते हुए इंकार कर दिया कि केंद्र सरकार ने उसे वैक्सीन सप्लाई नहीं करने का निर्देश दे रखा है। अब सवाल उठता है जब सारे निर्देश केंद्र सरकार दे रही है तो केंद्र सरकार जिम्मेदारी से क्यों भाग रही है? आज जब भारत में करोड़ों लोगों के जीवन पर प्रश्नचिन्ह खड़ा हो चुका है! भारत की गरीब जनता मोदी जी से सवाल पूछ रही है कि आपने “हमारे पिताजी और बच्चों की वैक्सीन विदेश क्यों भेज दी” तो मोदी सरकार उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज रही है। यह न सिर्फ संविधान के अनुच्छेद 19, 20 का उल्लंघन है बल्कि मानवता के विरुद्ध किया गया कृत्य हैं जिसे देश की जनता कभी माफ नहीं करेगी।

जिस समय कोरोना महामारी को रोकने के लिए एक राष्ट्रव्यापी नीति की जरूरत थी, उस समय मोदी सरकार इमेज मैनेजमेंट एवं बंगाल चुनाव में व्यस्त थी। वहीं दूसरी तरफ दिल्ली में केजरीवाल सरकार दिन-रात एक कर दिल्लीवासियों की जान बचाने का कार्य कर रही थी। पूरे भारत में प्रति मिलियन यानी दस लाख पर सबसे अधिक कोरोना टेस्ट दिल्ली में हो रहे हैं। कोरोनावायरस से निपटने के लिए केजरीवाल सरकार ने इंटर क्रीटेड कोविड-19 एंड कंट्रोल सेंटर लांच किया है. इस सेंटर से दिल्ली के अस्पतालों में बेड, ऑक्सीजन, वैक्सीनेशन और कोविड-19 से संबंधित सभी डाटा को रियल टाइम पर एकत्र किया जाएगा ताकि सार्थक और प्रभावशाली कदम उठाकर दिल्लीवासियों की जान बचाई जा सके. दिल्ली सरकार ने दिल्ली में कोविड-19 बेड एवं आईसीयू बेड की जानकारी उपलब्ध कराने के लिए दिल्ली कोरोनावायरस एप्प बनाई। दिल्ली में इस समय 28 हजार के करीब कोविड-19 बेड, 24000 कोविड ऑक्सीजन बेड एवं 7000 के करीब आईसीयू बेड उपलब्ध है। दिल्ली सरकार ने हाल ही में दिल्ली के हर जिले में 200 यूनिट ऑक्सीजन कंसंट्रेटर उपलब्ध कराये। इसके अतिरिक्त दिल्ली में देश का पहला प्लाज्मा बैंक खोला गया तथा होम आइसोलेशन प्रोग्राम भी आरंभ किए गए। केजरीवाल सरकार ने उचित समय पर साप्ताहिक लॉकडाउन एवं पूर्ण लॉकडाउन कर दिल्लीवासियों की रक्षा की। दिल्ली सरकार कोरोना की महामारी से जान गवा चुके कोरोना योद्धाओं को एक करोड़ की अनुग्रह राशि दी है। साथ ही कोरोना के कारण अपनों को खोने वाले सभी परिवारों के लिए 50,000 रुपये की अनुग्रह राशि एवं किसी कमाने वाले सदस्य को खोने वाले परिवार को अनुग्रह राशि के अलावा 2500 प्रति माह की पेंशन भी दी जाएगी साथ ही उनके बच्चों को मुफ्त शिक्षा दी जाएगी. इसके अतिरिक्त दिल्ली में ऑटो टैक्सी चालकों, दिल्ली मजदूरों के खाते में ₹5000 की आर्थिक मदद दी जा रही है. आपको बता दें कि पिछली बार दिल्ली सरकार ने 1,56,000 से अधिक दिल्ली मजदूरों एवं ऑटो टैक्सी चालकों को आर्थिक मदद की थी. कोरोनावायरस के दौरान भुखमरी से बचाने के लिए सरकार जून महीने तक दिल्ली वालों को मुफ्त राशन मुहैया कराएगी. इससे दिल्ली के 18 लाख परिवारों के लगभग 72 लाख लोगों को फायदा होगा. वहीं अब सार्वजनिक वितरण प्रणाली पीडीएस की राशन दुकान सप्ताह में 7 दिन खुली रहेगी. साथ ही दिल्ली सरकार दिल्ली में 200 से अधिक फ़ूड शेल्टर में गरीब दिहाड़ी मजदूरो को खाना मुहिये करा रही है. कोरोना महामारी के दौरान दिल्ली सरकार ने सभी फ्रंटलाइन वर्कर्स एवं कोरोनावायरस वारियर्स के साथ-साथ अपने कर्मचारियों को समय पर सैलरी उपलब्ध करा रही है. वहीं बीजेपी शासित एमसीडी में कोरोनावायरस के समय में भी 3 महीने से अधिक की सैलरी उसके कर्मचारियों को नहीं मिल पा रही है. ऐसे में दिल्ली की केजरीवाल सरकार ने हाल ही में एमसीडी को 1051 करोड़ रुपए आवंटित किए ताकि वह कोरोनावायरस के समय में उनको सैलरी दे सके।

भारत में कोरोना महामारी से निपटने के लिए हमें एक राष्ट्रव्यापी योजना बनाने की जरूरत है, हालांकि एक वास्तविक राष्ट्रव्यापी योजना को बनाने के काफी देरी हो गई है. हाल ही में दिल्ली के मुख्यमंत्री श्री अरविंद केजरीवाल जी ने प्रधानमंत्री मोदी को पत्र लिखा जिसमें उन्होंने वैक्सीन के लिए राष्ट्रव्यापी नीति को अपनाने की जरूरत के साथ साथ कोरोना वैक्सीन को अन्य कंपनियों के प्लांटो में भी बनाए जाने की बात कही ताकि युद्धस्तर पर वैक्सीन का प्रोडक्शन हो सके, ताकि प्रत्येक भारतीय की जान बचाई जा सके. हम उम्मीद करते हैं कि केंद्र सरकार केजरीवाल के सुझावों पर अमल करेगी क्योंकि इसी की वजह से दिल्ली में कोरोनावायरस के केस लगातार कम हो रहे है। दिल्ली में 22 अप्रैल 2021 को कोरोनावायरस की संक्रमण दर 36% थी जो 25 मई 2021 को घटकर 2 % रह गई है लेकिन अभी भी हम कोरोनावायरस को नहीं हरा पाए हैं। उसको हराने में काफी समय लगेगा इसलिए कोरोनावायरस महामारी को हराने के लिए हम सभी को मिलजुल कर कार्य करने की जरूरत है।

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