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BJP शासित MCD सेवानिवृत कर्मचारियों को कैशलेस मेडिकल सुविधा देने के नाम पर करोड़ों रुपए खा गई

January 18, 2021 07:03 PM

नई दिल्ली: आम आदमी पार्टी के मुख्य प्रवक्ता एवं विधायक सौरभ भारद्वाज ने कहा कि भाजपा शासित एमसीडी ने सेवानिवृत्त कर्मचारियों को कैशलेस मेडिकल सुविधा देने के लिए एक भी निजी अस्पताल का पंजीकरण ही नहीं किया और उनसे करोड़ों लेकर रुपए खा गई। नॉर्थ एमसीडी ने 34000 कर्मचारियों से मेडिकल इंश्योरेंस के नाम पर 221 करोड़ रुपए और ईस्ट एमसीडी ने भी करोड़ रुपए ले लिया, लेकिन वे इलाज के लिए दर-दर भटक रहे है। उन्होंने कहा कि एमसीडी से सेवानिवृत्त कर्मचारियों को कैशलेस मेडिकल सुविधा नहीं मिलने पर हाईकोर्ट ने फटकार लगाई है और भाजपा शासित एसमीडी से जवाब मांगा है। हाईकोर्ट ने कैशलेस मेडिकल सुविधा नहीं देने को उनके साथ धोखाधाड़ी बताया है। भाजपा शासित एमसीडी से सिर्फ दिल्ली वाले ही नहीं हैं, बल्कि कर्मचारी भी दुखी हैं। भाजपा नेता दिल्ली सरकार और कर्मचारियों से पैसा लेकर खा जाते हैं।

पार्टी मुख्यालय में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए आम आदमी पार्टी के मुख्य प्रवक्ता एवं विधायक सौरभ भारद्वाज ने कहा कि कुछ दिनों पहले हम लोगों ने एक प्रेस कांफ्रेंस की थी, जिसमें हमने एमसीडी से सेवानिवृत्त हुए शिक्षकों और अन्य कर्मचारियों के बारे में बताया था। हमने बताया था कि किस तरह से कोरोना की महामारी में एमसीडी शिक्षक और अन्य कर्मचारी जो सेवानिवृत्त हुए हैं, वो का इलाज के लिए दर-दर भटक रहे हैं। जबकि उनको एमसीडी द्वारा मेडिकल मेडिकल इंश्योरेंस और कैशलेस मेडिकल सुविधा मुहैया कराने का वादा किया गया था। हमारे भाजपा के जो नेता है, उनकी पुरानी आदत है कि एमसीडी के ऊपर जो बड़े भ्रष्टाचार का आरोप लगता है, इसको वे लोग सिरे से खारिज कर देते हैं और कहते हैं कि कोई भ्रष्टाचार ही नहीं हुआ है।

सौरभ भारद्वाज ने कहा कि आज हम लोग मीडिया के माध्यम से दिल्ली की जनता के पास इसलिए आए हैं, क्योंकि उस दौरान जो हमने कर्मचारियों के मेडिकल सुविधा को लेकर बात कही थी, उस पर हाईकोर्ट ने अपनी भी मुहर लगा दी है। स्वयं माननीय मुख्य न्यायाधीश बीएन पटेल और माननीय न्यायाधीश ज्योति सिंह की बेंच ने आज से चार-पांच दिन पहले हमारी कही हुई एक-एक बात को माना है और एमसीडी की अच्छी खिंचाई की है। सौरभ भारद्वाज ने कहा कि एमसीडी से जब भी कोई कर्मचारी सेवानिवृत्त होता है, तो एमसीडी बाकायदा उससे प्रीमियम वसूलती है। एक ग्रेड कर्मचारी से 1 लाख 20 हजार रुपए लिया जाता है। इसी तरह, बी ग्रेड के कर्मचारी से 78 हजार रुपए लिए जाते हैं, सी-ग्रेड कर्मचारी से 54 हजार रुपए और डी-ग्रेड के कर्मचारी से 30 हजार रुपए लिए जाते हैं। एमसीडी की तरफ से उन्हें कहा जाता है कि आपको अब सेवानिवृत्त होने के बाद तमाम निजी अस्पतालों के अंदर कैशलेस मेडिकल सुविधा सुविधा मिलेगी। अर्थात आप अस्पताल में जा कर वहां अपना कार्ड दिखाइए, वहां पर अपना इलाज करवा सकते हैं। एमसीडी ने उससे पैसे भी ले लिए।

सौरभ भारद्वाज ने कहा कि अगर मैं सिर्फ नार्थ एमसीडी का ही जिक्र करूं, तो नार्थ एमसीडी ने अपने करीब 34 हजार कर्मचारियों 221 करोड़ रुपए वसूला है। मजेदार बात यह है कि वे सारे कर्मचारी इलाज के लिए दर-बदर भटक रहे हैं। उनको कहीं पर भी मेडिकल की सुविधा नहीं मिल रही है। जब यह मामला हाईकोर्ट में पहुंचा, तब हाईकोर्ट यह पता चला कि एमसीडी ने किसी भी अस्पताल का पंजीकरण ही नहीं किया है। मतलब यह कि एमसीडी ने अभी तक किसी अस्पताल से बात ही नहीं की है कि हमको यह कैशलेस सुविधा अपने कर्मचारियों को देनी है। इस तरह 221 करोड़ रुपए एमसीडी खा गई। यह मामला उच्च न्यायालय के अंदर आया है। अब उच्च न्यायालय ने एमसीडी से इसका जवाब मांगा है। हाईकोर्ट ने कहा है कि इस तरह से 221 करोड रुपए खा जाना सीधा-सीधा धोखाधड़ी है। उसी तरीके से ईस्ट एमसीडी के अंदर भी कई सौ करोड़ रुपऐ अपने ही कर्मचारियों का एमसीडी खा गई। वहां भी कर्मचारियों को कोई कैशलेस सुविधा नहीं मिल रही है। इस तरह न सिर्फ दिल्ली वाले एमसीडी से दुखी हैं, बल्कि वो टीचर जो पूरी उम्र एमसीडी की सेवा करते हैं, वो भी दुखी हैं। उन कर्मचारियों से भी पैसा पैसा लेकर एमसीडी खा गई। अर्थात दिल्ली सरकार का पैसा लो, वो खा जाते हैं, ये अपने कर्मचारियों का पैसा खा जाते हैं। केंद्र सरकार ने भी इनको पैसा देना बंद कर दिया है। चुनाव से पहले भाजपा सांसद मनोज तिवारी ने कहा था कि हम इस बार दिल्ली के अंदर केंद्र से पैसा लेकर आएंगे, लेकिन उनको केंद्र सरकार भी पैसा नहीं दे रही है, क्योंकि उनको भी एमसीडी में बैठे भाजपा नेताओं पर भरोसा नहीं है।

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