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सरकार की नीयत साफ हो तो संसद का विशेष सत्र बुलाकर मिनटों में हल हो सकता है किसानों का मसला - भगवंत मान

December 04, 2020 10:26 PM

चण्डीगढ़: केंद्र सरकार की ओर से थोपे गए कृषि संबंधी काले कानून को रद्द करवाने के लिए आम आदमी पार्टी पंजाब के प्रदेश अध्यक्ष व सांसद भगवंत मान ने मोदी सरकार से अपील की है कि संसद का विशेष सत्र बुला कर फसलों की एमएसपी पर खऱीद को कानूनी गारंटी दो और सभी काले कानून रद्द किए जाएं। उन्होंने कहा कि किसानों की मांगें मान कर किसानों का मसला हल करने की बजाए सरकार ने अडिय़ल और अमानवीय रवैया अपनाया हुआ है, जो अति निंदनीय है। लाखों आंदोलनकारी किसान सर्द रातों में खुले आसमान के नीचे बैठे हैं। जिनमें बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं और अनहोनी के कारण मौतें भी होने लगी हैं। 

संसद में फसलों की एमएसपी पर खऱीद की कानूनी गारंटी और काले कानून रद्द करना ही है एकमात्र समाधान

आज शुक्रवार को भगवंत मान यहां मीडिया से रूबरू हुए और कहा कि उन्होंने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को भी पत्र लिख कर विशेष सत्र बुलाने की मांग की है। इसी तरह आम आदमी पार्टी के राज्यसभा के सदस्यों ने भी विशेष सत्र बुलाने की मांग की है, क्योंकि मसले का एकमात्र समाधान एमएसपी पर खऱीद को कानूनी गारंटी और काले कानूनों को रद्द करना ही है।

भगवंत मान ने कहा कि सरकार किसान नेताओं के साथ 7-7 घंटे बैठकें करके मसले को लटका रही है। यदि सरकार की नीयत खोटी न होती तो यह मसला सिर्फ साढ़े 7 मिनट में हल किया जा सकता है। यदि जीएसटी के समय पार्लियामेंट रात को खुल सकती है तो अब इन काले कानूनों को रद्द करने के लिए भी खोला जा सकता है।

संसद मैंबर ने कहा कि वास्तव में भाजपा को यह गलत-फहमी है कि 5-7 दिन बातचीत करके आंदोलन को लटकाया जाए जिससे किसान थक कर वापस चले जाएंगे। मान ने कहा कि किसानों की मांग बहुत सीधी और स्पष्ट है। मीटिंग-दर-मीटिंग के पीछे सरकार के मंसूबे बेहद संदेहजनक हैं। सरकार सब कुछ समझते हुए भी हकीकत से भाग रही है।

इस मौके पंजाब के मुख्य मंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह को आड़े हत्थों लेते भगवंत मान ने कहा कि पूरे मसले के दौरान अमरिन्दर सिंह की भूमिका बेहद संदेहजनक और सवालों के घेरे में रही है। ऐसे लगता है कि जैसे कैप्टन भाजपा के मुख्यमंत्री हों। बीते कल किसानों की बैठक से पहले कैप्टन की ओर से अमित शाह के साथ अकेले की गई बैठक ने इस संदेह को ओर पुख्ता कर दिया है। कैप्टन अचानक दिल्ली आए और सिर्फ अमित शाह के दरबार में हाजिरी लगवा कर चले गए, न आंदोलनकारी किसानों के पास आए और न ही अपनी हाईकमान को मिले। यहां तक कि बैठक के उपरांत मीडिया के सामने बेहद कमजोर स्टैंड रखा।

यदि नीयत साफ होती तो कैप्टन न केवल विरोधी दलों बल्कि दूसरे राज्यों के मुख्यमंत्रियों को साथ लेकर केंद्र सरकार पर दबाव बनाते। मान मुताबिक यह भी हो सकता है कि कैप्टन को मोदी सरकार ने ईडी के पास चल रहे मामलों के नाम पर धमकाया हो, क्योंकि केंद्र सरकार के पास कैप्टन अमरिन्दर सिंह और परिवार की बहुत सी कमजोरियां हैं। इसी दबाव में आकर कैप्टन भाजपा के साथ मिलकर किसान आंदोलन को राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ जोड़ कर कमजोर कर रहे है। उन्होंने यह भी कहा कि एक सोची समझी साजिश के अंतर्गत किसान आंदोलन को ‘तारपीडो’ करने के लिए सिर्फ पंजाब का आंदोलन कहा जा रहा है। आंदोलन सभी देश के किसानों और लोगों का सांझा है। पंजाब सिर्फ उसी तरह नेतृत्व कर रहा है जैसे देश की आजादी के आंदोलन में था।

मान ने कहा कि अकाली दल (बादल) की ओर से विरोधी पार्टियों को इकठ्ठा करने के सवाल के जवाब में कहा कि अकाली अब ड्रामेबाजी कर रहे हैं, यदि प्रकाश सिंह बादल किसानों के लिए इतने गंभीर होते तो एनडीए का हिस्सा रहते हुए यह कानून बनने ही न देते और न अब अवार्ड वापस करना पड़ता और न ही यह दिन देखने पड़ते। एक सवाल के जवाब में मान ने कहा कि जब से दिल्ली की केजरीवाल सरकार ने स्टेडियमों को जेलों में तब्दील करने से साफ मना किया है तब से ही भाजपा, कांग्रेस झूठे दोष लगा कर निंदा कर रही हैं।

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