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एमसीडी में प्राॅपर्टी टैक्स से संबंधित खातों का ब्यौरा नहीं होने से लूट का पता लगना मुश्किल काम

November 23, 2020 10:45 PM

नई दिल्ली: आम आदमी पार्टी के मुख्य प्रवक्ता सौरभ भारद्वाज ने भाजपा-181 सीरीज के तहत भाजपा शासित एमसीडी में बड़े पैमाने पर हो रहे भ्रष्टाचार की दूसरी किस्त मीडिया के जरिए दिल्ली निवासियों के सामने रखी। सौरभ भारद्वाज ने कहा कि नार्थ एमसीडी में प्राॅपर्टी टैक्स से संबंधित खातों का कोई ब्यौरा ही नहीं रखा जाता है और इसीलिए प्राॅपर्टी टैक्स में हो रही लूट का पता लगाने का कोई तरीका नहीं है। कोर्ट ने 2002 में टैक्स का डबल इंट्री सिस्टम लागू करने का आदेश दिया था, लेकिन 18 साल बाद भी यह सिस्टम लागू नहीं किया गया। 2003 के प्राॅपर्टी टैक्स कानून में एमसीडी को सभी प्राॅपर्टी का सर्वे कराने और उसी के मुताबिक टैक्स लगाने के लिए कहा गया था, लेकिन यह सर्वे नहीं किया गया। सौरभ भारद्वाज ने कहा कि रजिस्टर नहीं बने होने की वजह से कमर्शियल और किराए वाली प्राॅपर्टी में सबसे अधिक घालमेल किया जाता है। भाजपा बताए, क्या एमसीडी को चपत लगाने वाले अधिकारी निलंबित करके जेल भेजे गए और नहीं भेजे गए, तो क्यों न माना जाए कि अधिकारी और भाजपा नेता मिलीभगत करके एमसीडी को हजारों करोड़ रुपए की चपत लगाया है।

पार्टी मुख्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए आम आदमी पार्टी के मुख्य प्रवक्ता सौरभ भारद्वाज ने कहा कि 2017 में जब दिल्ली में निगम के चुनाव हुए तो भारतीय जनता पार्टी को पता था कि दिल्ली के लोग भाजपा के निगम पार्षदों से बेहद नाराज हैं और इसी बात को ध्यान में रखते हुए भारतीय जनता पार्टी ने नए चेहरों के साथ चुनाव लड़ा और नारा दिया था ‘नए चेहरे, नई उड़ान।’ जनता ने भाजपा की बात पर विश्वास करते हुए उन्हें एक और मौका दिया और 181 निगम पार्षदों के साथ निगम की सत्ता भाजपा को दोबारा सौंपी। परंतु नए चेहरों ने भी आकर भ्रष्टाचार की इस परंपरा को बरकरार रखा। भाजपा के नगर निगम में चल रहे भ्रष्टाचार की पोल खोलने के लिए हमने भाजपा-181 मुहिम की शुरुआत की, जिसके तहत हम प्रतिदिन एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से भाजपा के नगर निगम में चल रहे एक भ्रष्टाचार का खुलासा करेंगे। उसी श्रंखला में यह हमारी खुलासा नंबर-2 की प्रेस वार्ता है।

नार्थ एमसीडी ने इस वर्ष 2838 करोड़ रुपए प्राॅपर्टी टैक्स एकत्र करने का लक्ष्य रखा था, लेकिन सिर्फ 1703 करोड़ ही वसूल सकी- सौरभ भारद्वाज

सौरभ भारद्वाज ने आज संपत्ति टैक्स में एक नई लूट स्कीम का खुलासा करते हुए कहा कि भाजपा शासित नगर निगम द्वारा 20 अगस्त 2020 को जारी की गई। उन्होंने ऑडिट रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि इन की खुद की रिपोर्ट के मुताबिक भाजपा शासित नगर निगम का यह आंकलन था कि इस वर्ष उत्तरी दिल्ली नगर निगम लगभग 2838 करोड़ रुपए का टैक्स इकट्ठा करेगी। परंतु उत्तरी नगर निगम मात्र 1703 करोड़ रुपए ही टैक्स इकट्ठा कर पाई। उन्होंने कहा कि उत्तरी दिल्ली नगर निगम में संपत्ति टैक्स से संबंधित जो सबसे बड़ा भ्रष्टाचार चल रहा है, वह यह है कि उत्तरी दिल्ली नगर निगम संपत्ति टैक्स से संबंधित खातों का ब्यौरा ही नहीं रखते। यह जानने का कोई तरीका नहीं है कि इस संपत्ति टैक्स के मामले में नगर निगम कितना भ्रष्टाचार कर रहा है। वर्ष 2002 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए आदेश का हवाला देते हुए सौरभ भारद्वाज ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने भी कहा है कि डबल एंट्री सिस्टम लागू किया जाए। परंतु इस आदेश को 18 साल बीत चुके हैं, आज तक उत्तरी दिल्ली नगर निगम ने डबल एंट्री सिस्टम लागू नहीं किया है। हालांकि इस सिस्टम को बनाने के लिए भाजपा शासित नगर निगम कई बार लाखों रुपए खर्च कर चुका है, परंतु अभी तक कोई नियम नहीं बनाए गए हैं।

सौरभ भारद्वाज ने कहा कि मैं मीडिया के माध्यम से दिल्ली निवासियों के सामने जो तथ्य रख रहा हूं, वह काल्पनिक नहीं है, बल्कि भाजपा शासित नगर निगम के अपने ही वर्तमान की ऑडिट रिपोर्ट में कही गई बातें हैं।

कामर्शियल और किराए वाली प्राॅपर्टी के टैक्स में सबसे अधिक भ्रष्टाचार होता है- सौरभ भारद्वाज

सौरभ भारद्वाज ने बताया कि किसी संपत्ति पर कितना कर लगाया जाएगा, ऐसा कोई नियम भाजपा शासित नगर निगम ने किसी रजिस्टर में मेंटेन नहीं किया है। नगर निगम का क्षेत्रीय टैक्स अधिकारी इस बात को तय कर लेता है कि किस प्रॉपर्टी पर एक करोड़ टैक्स लेना है या उसे दोगुना करके दो करोड़ टैक्स लेना है या चार गुणा करके चार करोड़ रुपए टैक्स लेना है। उन्होंने कहा कि हमें मिली जानकारी के अनुसार निगम ने कुछ श्रेणी बनाई हुई हैं, जैसे कि प्रॉपर्टी किराए की है, प्रॉपर्टी कमर्शियल है, परंतु खाली पड़ी है, प्राॅपर्टी कमर्शियल है और इस्तेमाल की जा रही है, इस प्रकार की श्रेणियों के अनुसार प्रॉपर्टी का टैक्स दुगना या 4 गुना कर लिया जाता है। उन्होंने कहा कि सबसे बड़ा भ्रष्टाचार यहीं पर होता है। जो प्रॉपर्टी किराए की है उसे अपना दिखाया जा सकता है, जो प्रॉपर्टी कमर्शियल है और इस्तेमाल की जा रही है उसे खाली दिखाया जा सकता है, जिस खाली जमीन पर इमारत बन चुकी है उसे नगर निगम अपने रिकॉर्ड में खाली दिखा सकती है और यह सारी चीजें जिस एक रजिस्टर में दर्ज होनी चाहिए, इस प्रकार का कोई भी रजिस्टर भाजपा शासित नगर निगम नहीं बनाती है, यह बात खुद नगर निगम की ऑडिट रिपोर्ट में भी लिखी हुई है। जब 2003 में प्राॅपर्टी टैक्स का कानून बनाया गया तो यह कहा गया था कि नगर निगम के अधिकारी सारी संपत्तियों का एक सर्वे करेंगे, ताकि यह पता लगाया जा सके कि कौन सी संपत्ति रिहायशी है और कौन सी कमर्शियल है, और यदि कमर्शियल है तो बनी हुई है या खाली पड़ी है, खुद इस्तेमाल की जा रही है या किराए पर दी हुई है आदि। नगर निगम की खुद की सर्वे रिपोर्ट इस बात को कहती है कि इस प्रकार का कोई सर्वे नहीं किया गया, जिसकी वजह से हर वर्ष नगर निगम को करोड़ों रुपए का नुकसान हो रहा है। इसी रिपोर्ट में यह भी लिखा हुआ है कि कई करोड़ रुपए खर्च करके लगभग 11 लाख 47 हजार संपत्तियों को यूनिक प्रॉपर्टी आईडेंटिफिकेशन नंबर तो दिया गया, परंतु इन संपत्तियों के संबंध में किसी प्रकार का कोई रजिस्टर ब्यौरा रखने के लिए नहीं बनाया गया। सौरभ भारद्वाज ने कहा कि यह रजिस्टर इसलिए नहीं बनाए गए, ताकि भ्रष्टाचार किया जा सके और घोटाला करके इन संपत्तियों से आने वाला टैक्स भाजपा के नेताओं और अधिकारियों की जेब में जा सके।

अग्रवाल ऑटो माॅल ने मिलीभगत करके एमसीडी को करीब 90 लाख रुपए की चपत लगाई- सौरभ भारद्वाज

नगर निगम की ही ऑडिट रिपोर्ट में दिए गए एक उदाहरण का हवाला देते हुए सौरभ भारद्वाज ने कहा कि शालीमार बाग इलाके में अग्रवाल ऑटो मॉल है, जिसमें 2 फ्लोर पर पार्किंग चल रही है। उन्होंने बताया कि 2010 में इस मॉल की पार्किंग जिन फ्लोर पर चल रही है, उसका संपत्ति कर आया। परंतु पिछले कई साल से यहां से किसी प्रकार का कोई संपत्ति कर नहीं दिया गया, यह कहते हुए की पार्किंग नहीं चल रही है। उन्होंने कहा कि एक मॉल जो आज भी चल रहा है, ऐसा कैसे संभव है कि वहां पार्किंग न चल रही हो। सात साल बाद शिकायत होने पर जब नगर निगम ने इसकी जांच की तो पता चला की इस प्रॉपर्टी से नगर निगम को लगभग 90 लाख रूपए का नुकसान हुआ है। उन्होंने कहा कि जब कभी हम कहते हैं कि भाजपा नगर निगम में भ्रष्टाचार कर रही है, तो भाजपा के हमारे लोग बेहद नाराज हो जाते हैं। सौरभ भारद्वाज ने आगे कहा कि मैं बताना चाहता हूं कि किस तरह से प्राॅपर्टी टैक्स में भ्रष्टाचार किया जा रहा है। मैं बताना चाहता हूं कि जब इस प्राॅपर्टी का मूल्यांकन हुआ तो भाजपा की एमसीडी ने किस तरह से इसके ऊपर मिट्टी डाली। 31 मार्च 2018 को जो पुराना असेसमेंट किया था, उसको सुधारा गया, 31 तारीख को ही प्रॉपर्टी के मालिक ने इनको एफिडेविट दिया कि आपने जो मूल्यांकन किया है, वह गलत है। 31 को ही इन्होंने प्रॉपर्टी का निरीक्षण कर लिया, 31 तारीख को ही एसेसमेंट के हिसाब से प्रॉपर्टी के मालिक ने एमसीडी को टैक्स भी जमा करा दिया। पूरी मिलीभगत के साथ उन्होंने लाखों रुपए की चपत अपने ही विभाग को लगा दी। सीधी सी बात है कि जब एमसीडी को लाखों रुपए की चपत लगाई जाती है, तो उसका कुछ हिस्सा अफसरों की जेब में भी जाता है।

अधिकारियों से मलीभगत करके प्रॉपर्टी टैक्स का फायदा बड़े-बड़े लोगों को दिया जाता है, ताकि रिश्वत का पैसा अफसरों और नेताओं के जेब में जा सके- सौरभ भारद्वाज

सौरभ भारद्वाज ने कहा कि ऑडिट रिपोर्ट में एक और घोटाला सामने आया। झंडेवालान के अंदर वीडियोकॉन टाॅवर वाली प्रॉपर्टी के अंदर 72 लाख रुपए की हेराफेरी की गई। जो प्रॉपर्टी इस्तेमाल में आई उसको खाली दिखाकर यह हेराफेरी की गई। कोई भी प्रॉपर्टी जिसका टैक्स दिया जा रहा है, अगर वह खाली हो गई है तो 15 दिन के अंदर अंदर प्रॉपर्टी के मालिक को नगर निगम को सूचना देनी पड़ती है कि मेरी प्रॉपर्टी खाली है। एमसीडी का अधिकारी उस प्रॉपर्टी पर जाकर निरीक्षण करता है। इन सब मामलों के अंदर न ही नोटिस दिया गया और न ही इसका निरीक्षण किया गया। एमसीडी को करोड़ों रुपयों की टैक्स की चपत लगा दी गई। इसके अलावा रोहिणी स्थित जगन्नाथ गुप्ता मेमोरियल एजुकेशन सोसायटी के अंदर गड़बड़ी करके 24 लाख रुपए की चपत अपनी ही एमसीडी को लगाई गई। इसके बाद पीतमपुरा में अभिनव पब्लिक स्कूल ने खाली जमीन का टैक्स नहीं दिया। अगर किसी जमीन पर 25 फीसदी से ज्यादा बिल्डिंग बन जाए, तो उसका खाली जमीन का टैक्स माफ हो जाता है। लेकिन जमीन पर कुछ नहीं बनने के बाद भी स्कूल ने खाली पड़ी जमीन का टैक्स माफ करा लिया और एमसीडी को 23 लाख रुपए की चपत लगाई।

सौरभ भारद्वाज ने कहा कि दीनदयाल उपाध्याय मार्ग पर गांधी पीस फाउंडेशन ने एमसीडी को 21 लाख की चपत लगाई। रोहिणी के युवा शक्ति मॉडल स्कूल ने खाली जमीन के टैक्स के नाम पर एमसीडी को 21 लाख रुपए की चपत लगाई। शालीमार बाग में फोर्टिस अस्पताल में 25 फीसदी से कम बिल्डिंग बनाई गई और उसे 25 फीसदी से ज्यादा बताकर खाली जमीन का टैक्स नहीं भरा गया। जब कोई प्रॉपर्टी का मालिक टैक्स के लिए एप्लाई करते समय यह बताता है कि उसकी जमीन पर 25 फीसदी से ज्यादा इमारत बन चुकी है, तो ऐसे में एमसीडी का एक अफसर उस जगह का निरीक्षण करने के लिए जाता है कि दी गई जानकारी सही है या नहीं। लेकिन वसंत कुंज के फोर्टिस अस्पताल ने एमसीडी को 14 लाख रुपए की चपत लगाई।

उन्होंने कहा, हमारे कहने का मकसद सिर्फ इतना है कि एमसीडी ने प्रॉपर्टी रिश्वत के चलते कई हजार करोड़ रुपए का नुकसान एमसीडी का किया है। यह नुकसान बड़े-बड़े कॉरपोरेशन ने दिया है। मिली जुली भगत के चलते प्रॉपर्टी टैक्स का फायदा बड़े-बड़े लोगों को दिया जाता है और यह सब इसलिए किया जाता है ताकि रिश्वत का पैसा अफसरों और नेताओं के जेब में जा सके। यह पैसा एमसीडी के पास न आकर अफसरों और नेताओं की जेब में चला जाता है। हमारे द्वारा चलाई जा रही सीरीज में लूट नंबर 2 पर भाजपा नेता जवाब दें। भाजपा नेता बताएं कि किन अफसरों ने जानबूझकर लाखों रुपयों की चपत एमसीडी को लगाई है? क्या वह अफसर सस्पेंड हो चुके हैं? क्या वह अफसर जेल में है? अगर वह अफसर अभी तक जेल नहीं गए हैं तो क्यों न यह मान लिया जाए कि एमसीडी के अफसर मिलीभगत करके हजारों करोड़ रुपए की चपत एमसीडी को लगा रहे हैं।

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