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हरियाणा-पंजाब सरकारों की आपराधिक लापरवाही की वजह से जलती है पराली, साफ हवा में सांस नहीं ले पा रहे: आतिशी

November 17, 2020 11:21 PM

नई दिल्ली: आम आदमी पार्टी की वरिष्ठ नेता एवं विधायक आतिशी ने कहा कि भाजपा शासित हरियाणा और कांग्रेस शासित पंजाब में बड़े पैमाने पर पराली जलाने की वजह से उत्तर भारत और दिल्ली वाले साफ हवा में सांस नहीं ले पा रहे हैं। पंजाब और हरियाणा के मुख्यमंत्रियों की आपराधिक लापरवाही की वजह से दिल्ली-एनसीआर के लोग पिछले डेढ़ महीने से प्रदूषण से परेशान हैं। कोरोना की वैश्विक महामारी के दौरान पंजाब और हरियाणा में जलाई जा रही पराली के प्रदूषण ने दिल्ली वालों के फेफड़ों को कमजोर कर दिया है। वहीं, पिछले दो दिनों से दोनों राज्यों में पराली जलाने के केस कम हो गए हैं, जिसके बाद दिल्ली-एनसीआर की हवा साफ हो गई है और प्रदूषण कम होने से लोगों का दम नहीं घुट रहा है। आतिशी ने कहा कि दिल्ली ने बाॅयो डीकंपोजर केमिकल से पराली का समाधान दे दिया है। क्या पंजाब और हरियाणा के मुख्यमंत्री अपने किसानों को केवल 30 रुपए प्रति एकड़ का खर्चा भी नहीं दे सकते हैं? आम आदमी पार्टी, सुप्रीम कोर्ट और एयर क्वालिटी कमीशन से अपील करती है कि पराली जलाने की घटना का स्वतः संज्ञान लेकर हरियाणा व पंजाब के मुख्यमंत्रियों के खिलाफ आपराधिक लापरवाही का मुकदमा दर्ज किया जाए। 

पंजाब और हरियाणा के मुख्यमंत्रियों की आपराधिक लापरवाही की वजह से दिल्ली-एनसीआर के लोग पराली जलाने से हो रहे प्रदूषण से परेशान, क्योंकि कोरोना महामारी के दौरान पडोसी राज्यों में जलाई जा रही पराली से हो रहे प्रदूषण ने लोगों के फेफड़ों को कमजोर कर दिया, दोनों पर मामला दर्ज हो- आतिशी

हरियाणा और पंजाब के किसानों ने पराली जलाना बंद कर दिया है, जिसके बाद से दिल्ली की आबो हवा साफ हो गई है। इसको लेकर विधायक आतिशी ने पार्टी मुख्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस की। उन्होंने कहा कि आज दिल्ली वालों के लिए बहुत खास दिन है, क्योंकि करीब डेढ़ महीने बाद दिल्लीवासियों को नीला आसमान देखने को मिला है। डेढ़ महीने बाद दिल्ली वालों को चमकती धूप देखने को मिली है और ऐसी आबोहवा मिली है, जिसमें अब उनका दम नहीं घुट रहा है। दिल्ली के लोग इस हवा में अब वह चैन से सांस ले सकते हैं। पिछले डेढ़ महीने से और हर साल अक्टूबर-नवंबर के महीने में दिल्ली वालों का सांस लेना मुश्किल हो जाता है। छोटे-छोटे बच्चों को परेशानियां होती हैं और घर के बुजुर्गों को सांस संबंधी समस्या के चलते बार-बार डॉक्टर के पास ले जाना पड़ता है।

उन्होंने आगे कहा कि इस बार परिस्थिति और भी ज्यादा गंभीर हो गई, क्योंकि वैश्विक महामारी कोरोना का कहर दुनिया भर में जारी है। कोरोना का सबसे ज्यादा असर लोगों के फेफड़ों पर पड़ता है। पिछले डेढ़ महीने से प्रदूषण के चलते लोगों के फेफड़े कमजोर हो गए। कोरोना की वजह से लोगों को जो हल्की बीमारियां होती थीं, प्रदूषण ने उनको बढ़ा दिया। दिल्ली के लोग भारी प्रदूषण के चलते कई गंभीर बीमारियों से जूझ रहे हैं। इसका मुख्य कारण है कि हर साल की तरह पंजाब और हरियाणा में इस साल भी बड़े पैमाने पर पराली जलाई जा रही है। दिल्ली के लोग सही से सांस नहीं ले पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि आखिर आज ऐसा क्या जादू हो गया कि अचानक से दिल्ली की हवा साफ हो गई और आसमान साफ नजर आने लगा।

आतिशी ने एक ग्राफ दिखाते हुए कहा कि जैसे ही 15-16 और 17 अक्टूबर आता है, पंजाब में रोजाना 1500, 2000, 4000 और नवंबर के शुरू तक पहुंचते-पहुंचते 5000 से भी ज्यादा पराली जलाने के मामले सामने आते हैं। यही कारण है कि दिल्ली-एनसीआर वाले सांस नहीं ले पाते हैं। अगर आप पिछले दो दिनों यानी 14 नवंबर और 15 नवंबर का डेटा देखें, तो हरियाणा और पंजाब में पराली जलाने के मामले 2500 से घटकर 125 हो जाते हैं। जैसे ही पंजाब और हरियाणा में पराली जलाने में कमी आई है, वैसे ही दिल्ली और उत्तर भारत की आबोहवा साफ हो गई। पराली के कारण साफ हवा, चमकता सूरज और नीला आसमान, जो पिछले डेढ़ महीने में देखने को नहीं मिल रहा था, वह हमें पिछले दो दिनों में देखने को मिला है। 

केजरीवाल सरकार ने बाॅयो डीकंपोजर केमिकल से पराली का समाधान दे दिया है, क्या पंजाब व हरियाणा के मुख्यमंत्री अपने किसानों को क्यों नहीं दे सकते?- आतिशी

उन्होंने आगे कहा कि अब सवाल उठता है कि दिल्ली और उत्तर भारत का दम घुटने के लिए कौन जिम्मेदार है। इस सबके लिए हरियाणा और पंजाब के मुख्यमंत्री जिम्मेदार हैं, क्योंकि उनकी जिम्मेदारी थी कि वह एक ऐसा समाधान निकालें, जिससे उन राज्यों के किसान पराली न जलाएं। पंजाब और हरियाणा के मुख्यमंत्रियों की आपराधिक लापरवाही के चलते दिल्ली के लोगों का दम घुट रहा था। दोनों राज्यों की सरकारें कहती थीं कि पराली का कोई समाधान नहीं है, लेकिन दिल्ली सरकार ने इसका समाधान खोज निकाला है। दिल्ली सरकार ने पूसा संस्था के साथ मिलकर जो तकनीक निकाली है, वो बेहद ही सस्ती है। इसके लिए 30 रुपए एकड़ का खर्चा आता है। मैं पंजाब और हरियाणा सरकार से सवाल पूछती हूँ कि क्या आप अपने राज्य के किसानों को 30 रुपये एकड़ भी खर्च नहीं दे सकते।

आतिशी ने आगे कहा कि दिल्ली सरकार ने जब केंद्र सरकार की संस्था के साथ मिलकर पराली का समाधान निकाल लिया, तो हरियाणा और पंजाब की सरकारों ने ऐसा क्यों नहीं किया? आखिर क्यों हरियाणा और पंजाब की सरकारों ने दिल्ली और उत्तर भारत के लोगों और बच्चों को गंभीर स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं में डाल दिया? आज सुप्रीम कोर्ट और एयर क्वालिटी कमीशन पराली से प्रदूषण संबंधी समस्याओं को देखते हैं। हम आग्रह करते हैं कि सुप्रीम कोर्ट और एयर क्वालिटी कमीशन इसका स्वतः संज्ञान लें। हमारी मांग है कि सुप्रीम कोर्ट और एयर क्वालिटी कमीशन स्वतः संज्ञान लेते हुए हरियाणा और पंजाब के मुख्यमंत्री के खिलाफ आपराधिक लापरवाही का मुकदमा दर्ज करें और उन पर सख्त से सख्त कार्रवाई करें।

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