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केजरीवाल एकमात्र ऐसे मुख्यमंत्री, जिन्होंने प्रदूषण के खिलाफ लड़ाई की गंभीरता के साथ इच्छा जताई: राघव चड्ढा

October 07, 2020 10:05 PM

नई दिल्ली: आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता राघव चड्ढा ने कहा कि पूरे देश में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल एकमात्र ऐसे मुख्यमंत्री हैं, जिन्होंने प्रदूषण के खिलाफ गंभीरता और पूरी ईमानदारी के साथ लड़ने की इच्छा दिखाई है। पंजाब और हरियाणा वायु-प्रदूषण के मामले में उदासीनता बरत रहे हैं और पराली जलने से रोकने के लिए कोई कदम नहीं उठा रहे हैं। पिछले साल के मुकाबले अक्टूबर के पहले सप्ताह में पराली जलाने के मामलों में पंजाब में 9 गुना और हरियाणा में 3 गुना वृद्धि हुई है। श्री चड्ढा ने कहा कि एक तरफ, पीएम नरेंद्र मोदी वायु प्रदूषण से निपटने की बात करते हैं, लेकिन दूसरी तरफ हरियाणा की भाजपा सरकार ने पीएम की सलाह को नजरअंदाज किया है।  केंद्रीय वित्त मंत्री ने घोषणा की है कि केंद्र सरकार हवा को स्वच्छ करने के लिए 4,400 करोड़ रुपये खर्च करेगी हम पूछना चाहते हैं कि यह पैसा कहां गया? उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी की मांग है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त ईपीसीए पराली जलाने की शिकायतों की अनदेखी करने के लिए पंजाब और हरियाणा सरकार के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करे।

आम आदमी पार्टी के विधायक राघव चड्ढा ने पराली की वजह से दिल्ली में होने वाले वायु प्रदूषण और लोगों की स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को लेकर प्रेस कॉन्फ्रेंस की। राघव चड्ढा ने पार्टी मुख्यालय में बुधवार को कहा कि आज से दो दिन पहले दिल्ली के लोकप्रिय मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने वायु प्रदूषण को लेकर एक्शन प्लान जारी किया। ‘युद्ध, प्रदूषण के विरुद्ध’ नाम से एक अभियान भी शुरू किया कि किस प्रकार से दिल्ली वालों के स्वास्थ्य की रक्षा की जा सके और किस तरह से दिल्ली में वायु प्रदूषण को कम किया जा सके। अरविंद केजरीवाल देश के इकलौते ऐसे मुख्यमंत्री हैं, जिन्हें वायु प्रदूषण से लोगों के स्वास्थ्य को पर हो रहे खराब असर की चिंता है। श्री अरविंद केजरीवाल देश के इकलौते ऐसे मुख्यमंत्री हैं, जो लोगों के स्वास्थ्य को लेकर चिंतित हैं और बड़े कदम उठा रहे हैं। दिल्ली के लोग भाग्यशाली हैं कि उनको ऐसा मुख्यमंत्री मिला है, जो वायु प्रदूषण से अकेले लड़ाई लड़ रहा है, लेकिन दिल्ली अकेले वायु प्रदूषण की लड़ाई को नहीं लड़ सकती।

उन्होंने आगे कहा कि दिल्ली के पड़ोसी राज्यों और अन्य कारणों की वजह से दिल्ली में वायु प्रदूषण बढ़ता है। पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में होने वाले वायु प्रदूषण को हवा दिल्ली ले आती है। दिल्ली वालों के फेफड़ों पर इसका बुरा प्रभाव पड़ता है और दिल्ली एक गैस चैंबर में तब्दील हो जाती है। हर सर्दियों में हमें यह अक्सर देखने को मिलता है। पिछले साल TERI की स्टडी के अनुसार, दिल्ली में जो वायु प्रदूषण होता है, उसका 70 फीसदी कारण पड़ोसी राज्य यानी पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश हैं। दिल्ली के वायु प्रदूषण का सबसे मुख्य कारण पंजाब, हरियाणा और यूपी में जलाई जाने वाली पराली है।

राघव चड्ढा ने आगे कहा कि पिछले साल केंद्र सरकार की संस्था, सीपीसीबी के आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली में वायु प्रदूषण का सबसे बड़ा कारण(45 फीसदी) पराली जलाना है। मुख्य तौर पर पराली पंजाब, हरियाणा और यूपी में जलाई जाती है। लगभग 15 अक्टूबर से पराली जलाने के कारण दिल्ली गैस चैंबर में बदल जाती है। सुप्रीम कोर्ट, सीएससी, केंद्र सरकार और राज्य सरकारों की प्रदूषण पर नजर रखने वाली संस्थाएं लगातार पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश से कहती रही हैं कि वो प्रदूषण को लेकर कोई ठोस कदम उठाएं और पराली पर रोक लगाएं, लेकिन आज यह कहते हुए दुख होता है कि दिल्ली को गैस चैंबर में तब्दील करने में पंजाब और हरियाणा की मुख्य तौर पर निष्क्रियता और आपराधिक लापरवाही के चलते दिल्ली में आने वाले दिनों में स्थिति गंभीर होती नजर आ रही है। पंजाब और हरियाणा की सरकारों ने महाभारत की गांधारी की तरह आंखों पर पट्टी बांध ली है और सच से मुकर रहे हैं। उन्हें दिल्ली के लोगों के स्वास्थ की भी परवाह नहीं है।

उन्होंने आगे कहा कि मैं पंजाब और हरियाणा को चेतावनी देता हूं कि वो अपनी इस आपराधिक लापरवाही, गैर जिम्मेदाराना बर्ताव और निष्क्रियता की नींद से जागकर, दिल्ली के नागरिकों के बारे में सोचें, अपने राज्यों में पराली जलाने पर रोक लगाएं और किसानों की मदद करें। मैं आपको बताना चाहता हूं कि सरकार ने वादे तो बहुत किए, केंद्र सरकार और देश की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने यूनियन बजट में घोषणा की थी कि हम 4400 करोड़ रुपये हवा को स्वच्छ करने के लिए देंगे। मैं पूछना चाहता हूं कि वो पैसा कहां है, अभी तक किसानों को वो पैसा क्यों नहीं दिया गया, किसानों को अभी तक हैप्पी शीडर मशीन क्यों नहीं दी गईं? पराली जलाने को लेकर आज तक केंद्र सरकार ने कोई परिवर्तनात्मक उपाय क्यों नहीं दिया? आज फिर से पराली जलाने की स्थिति क्यों आ पड़ी है?

राघव चड्ढा ने कहा कि मैं साफ तौर बताना चाहता हूं कि जो पराली जलाने का मौसम अक्टूबर से शुरू होता था अब वो एक महीने पहले ही शुरू हो गया है। अक्टूबर के पहले हफ्ते में जलाई जाने वाली पराली में पिछले साल के मुकाबले पंजाब में नौ गुना और हरियाणा में तीन गुना का इजाफा हुआ है। यानी पिछले साल के मुकाबले पराली जलाने के मामलों में बढ़ोत्तरी हुई है। अक्टूबर के पहले हफ्ते में पंजाब में पराली जलाने के 606 मामले दर्ज किए गए हैं, जबकि हरियाणा में 137 मामले दर्ज किए गए हैं। इसके साथ दिल्ली को गैस चैंबर में तब्दील करने पर पंजाब और हरियाणा की मुख्य तौर पर भागीदारी को लेकर सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित ईपीसीए गंभीर संज्ञान ले। ईपीसीए दोनों राज्यों की सरकारों को उचित कदम उठाने पर विवश करे, नहीं तो दिल्ली वालों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करने का काम एक बार फिर से पंजाब और हरियाणा करेंगे।

उन्होंने कहा कि इस साल पंजाब, हरियाणा और यूपी में लगभग 35 मिलियन टन पराली जलाए जाने की संभावना है। जब यह प्रदूषण हवा के साथ दिल्ली पहुंचेगा तो इससे सिर्फ लोगों का स्वास्थ्य ही खराब होगा। मैं तमाम राज्यों से गुजारिश करता हूं कि वो इसे रोकें। पंजाब में 2019 में 20 मिलियन टन धान की पराली थी, जिसमें से 9.8 मिलियन टन जला दी गई थी। वहीं, हरियाणा में सात मिलियन टन धान की पराली थी जिसमें से 1.23 टन जलाया गया था। यानी दोनों राज्यों में पिछले साल 11 मिलियन टन पराली जलाई गई थी। एक तरफ सीएम केजरीवाल लगातार कदम उठा रहे हैं, 7 प्वाइंट एक्शन प्लान ला रहे हैं, प्रदूषण से निपटने के लिए नए-नए आइडिया ला रहे हैं लेकिन, पंजाब और हरियाणा की सरकारें अपनी आपराधिक लापरवाही के चलते दिल्ली को गैस चैंबर में तब्दील करने पर लगी हुई हैं।

राघव चड्ढा ने आगे कहा, यूनिवर्सिटी ऑफ शिकागो की रिपोर्ट के अनुसार, अगर दिल्ली में डब्ल्यूएचओ के वायु प्रदूषण से संबंधित मानक लागू कर दिए जाएं तो दिल्ली के प्रति व्यक्ति की आयु में 9.4 साल की बढ़ोत्तरी हो जाएगी। वहीं, अगर सिर्फ इंडियन नेशनल के मानक ही लागू कर दिए जाएं तो प्रति व्यक्ति की आयु 6.5 साल ज्यादा बढ़ जाएगी। लोगों का स्वास्थ्य अच्छा रहेगा और उनकी उम्र बढ़ जाएगी। दिल्ली में 70 फीसदी से अधिक वायु प्रदूषण का कारण पंजाब, हरियाणा और यूपी हैं। मैं उन राज्यों से कहना चाहूंगा कि वो स्थिति का संज्ञान लें। सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित ईपीसीए संज्ञान लेते हुए इन राज्य की सरकारों को विवश करे कि वो इसपर तुरंत कार्रवाई करें।

उन्होंने आगे कहा कि प्रधानमंत्री भी कहते हैं कि हमें वायु प्रदूषण से लड़ना है, लेकिन हरियाणा की भाजपा सरकार इसे मानने को तैयार नहीं है। दिल्ली और उत्तरी भारत में बढ़ रहे वायु प्रदूषण को लेकर नासा ने फोटो और आंकड़े जारी किए हैं कि किस तरह से पंजाब और हरियाणा से आने वाले पराली के धुएं की वजह से दिल्ली के अंदर वायु प्रदूषण के मामले बढ़ते नजर आ रहे हैं। दिल्ली में अभी तक सर्दी ने दस्तक नहीं दी है लेकिन पंजाब और हरियाणा के पराली के धुएं ने दस्तक दे दी है। मैं पंजाब और हरियाणा की सरकारों को चेतावनी देता हूं कि वो तुरंत स्थिति को नियंत्रण में लाएं। हम बिल्कुल भी यह बर्दाश्त नहीं करेंगे कि उनकी वजह से दिल्ली की जनता को स्वास्थ्य संबंधित समस्याओं से जूझना पड़े।

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