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बेलगाम नौकरशाह और लापरवाह मंत्री, इस्तीफा दे सीएम त्रिवेंद्र सिंह: प्रदेश अध्यक्ष कलेर

September 27, 2020 02:50 PM

उत्तराखंड राज्य के मुखिया त्रिवेंद्र सिंह रावत नौकरशाही पर लगाम नहीं लगा पा रही है। आए दिन कैबिनेट मंत्री और स्वतंत्र प्रभार राज्यमंत्री अफसरों के खिलाफ अपनी नाराज़गी दिखाते नजर आ ही जाते हैं। हाल में राज्यमंत्री रेखा आर्य के आउटसोर्स कंपनी के टेंडर निरस्त के बाद नौकरशाह और मंत्री का विवाद आजकल सुर्खियों में है। यहां तक रेखा आर्य ने मामला पुलिस महकमे तक पहुंचा दिया था।

आम आदमी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष एस एस कलेर ने एक बयान जारी करते हुए कहा कि इस प्रदेश के मुख्यमंत्री को ना सूबे की कोई फ़िक्र है, और ना ही अपने मंत्रियों को लेकर कोई संजीदगी। इसलिए आए दिन अफसरशाही बेलगाम होते जा रही और मंत्री मीडिया के जरिए अपना रोना रो रहे। वरिष्ठ मंत्री सतपाल महाराज भी अब चरित्र पंजिका(सीआर) को लेकर अपनी बात रख रहे। इसका मतलब विभागीय मंत्री अब तक चरित्र पंजिका को लेकर कोई जागरूक नहीं थे। इससे ये साफ होता है सूबे के मुखिया को किसी से कोई सरोकार नहीं है और उनकी इसी सोच ने राज्य के विकास के लगभग चार साल बर्बाद कर दिए। कलेर ने कहा- स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार, स्वरोजगार, विकास जैसे मुद्दों पर फेल हो चुके मुख्यमंत्री के अंदर थोड़ा भी नैतिकता बची है तो उनको तत्काल मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे देना चाहिए। आपको बता दें कि पिछले साढ़े तीन सालों में मंत्रियों और अधिकारियों के बीच तनातनी समय समय पर मीडिया के माध्यम से जनता के बीच आई इसके बावजूद मुख्यमंत्री इस मुद्दे पर अब तक कोई नीतिगत निर्णय नहीं ले पाए हैं।

‘आप’ पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष ने राज्य के मुखिया और उनके मंत्रिमंडल के सहयोगियों पर भी सवाल उठाते हुए पूछा है, कि जब आपस में तालमेल ही नहीं है तो राज्य में जनता का भला आखिर कैसे हो पाएगा। जनप्रतिनिधियों ने जीत के बाद अपनी ज़िम्मेदारियों को भूला दिया और इससे बड़ा दुर्भाग्य इस सूबे की जनता के लिए क्या होगा जहां,सचिव स्तर के अधिकारी की चरित्र पंजिका विभागीय मंत्री तक नहीं पहुंचती जिस कारण अधिकारी अपनी मनमानी पर उतारू है और वह मंत्रियों की बात भी नहीं सुनते। विभागीय मंत्रियों को दरकिनार कर सीधे मुख्यमंत्री के संपर्क के चलते, ये सीधे सीधे कार्यपालिका की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े करती है।

कलेर ने कहा- नियमावली में अनुदेश 1982 के नियमों में स्पष्ट प्रावधान है कि मंत्री प्रथम श्रेणी के अधिकारियों के संबंधित विभागीय कार्रवाई, निलंबन, शास्ती, चयन प्रोन्नति, स्थानांतरण, प्रतिकूल चरित्र प्रविष्टियों का विलोपन, प्रतिनियुक्ति करने का अधिकार रखता है, लेकिन राज्य में भाजपा की सरकार बनने के बाद इन नियमों को ताक पर रख दिया गया है और अधिकारी जनता के चुने हुए प्रतिनिधियों को ही दरकिनार कर रहे और ज्यादातर मंत्री सिवाय अपने रोने के अलावा कुछ नहीं कर पा रहे हैं। इसलिए अब मुख्यमंत्री टीएसआर को अपना इस्तीफा तुरंत देकर पहाड़ों की तरफ रुख करना चाहिए और अपने पिछले साढ़े तीन सालों के विकास को,जो उन्होंने मीडिया के जरिए बताया- उन्हें ढूंढ कर दिखाए और फिर 2022 के चुनावों में अपना भाग्य आजमाएं। जनता उनके विकास के आधार पर उनका निर्णय खुद लेगी।

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