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‘आप’ और किसानों के विरोध के बाद अकाली और कांग्रेस ने ‘एमएसपी अध्यादेश’ पर यू-टर्न लिया, यह हमारी जीत- भगवंत मान

September 17, 2020 06:00 PM

नई दिल्ली: आम आदमी पार्टी के सांसद भगवंत मान ने कहा कि ‘आप’ और किसानों के विरोध के बाद शिरोमणि अकाली दल और कांग्रेस ने एमएसपी अध्यादेश पर यू-टर्न ले लिया है, यह हमारी जीत है। कुछ दिन पहले तक शिरोमणि अकाली दल इन किसान विरोधी बिलों का समर्थन कर रहा था और आज वे मगरमच्छ के आंसू बहा रहे हैं। पंजाब में कांग्रेस के सीएम और वित्त मंत्री, दोनों ने पहले इन बिलों का समर्थन किया था। उन्हें इन किसान विरोधी बिलों को तब रोकना चाहिए था, जब ये शुरूआती चरण में थे और तब इन बिलों को संसद तक पहुंचने ही नहीं देना चाहिए था। भगवंत मान ने कहा कि केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर को उस दिन इस्तीफा देना चाहिए था, जब केंद्रीय कैबिनेट में यह बिल आया था और वो मौजूद थी, तब उन्हें वाॅकआउट करना था, लेकिन उस समय उन्होंने सहमति दे दी। वहीं ‘आप’ विधायक जरनैल सिंह ने कहा कि एमएसपी बिल के जरिए शिरोमणि अकाली दल और कांग्रेस का असली चेहरा किसानों के सामने बेनकाब हो गया है। हम संसद के अंदर और बाहर अपना विरोध जारी रखेंगे और लोगों को बताएंगे कि शिरोमणि अकाली दल और कांग्रेस दोनों किसान विरोधी हैं।

यह अध्यादेश कांग्रेस का ही बोया हुआ बीज है, जिसका खामियाजा आज पूरे देश के किसानों को भुगतना पड़ रहा- जरनैल सिंह

सांसद भगवंत मान और विधायक जरनैल सिंह ने पार्टी मुख्यालय में आज संयुक्त रूप से प्रेस वार्ता को संबोधित किया। आम आदमी पार्टी के विधायक जरनैल सिंह ने कहा कि एमएसपी अध्यादेश के जरिए आज कांग्रेस और अकाली दल का असली चेहरा जनता के सामने आ गया है। उन्होंने कहा कि सबने देखा है कि चाहे अकाली दल के मुखिया सुखबीर सिंह बादल हों या प्रकाश सिंह बादल हों या केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल हों, किस तरह से पिछले कई महीनों से इस एमएसपी अध्यादेश की वकालत करते रहे हैं कि यह अध्यादेश किसानों के हित में है और जब किसानों का दबाव इन लोगों पर पड़ा, किसानों ने इस बात का ऐलान कर दिया कि जो इस अध्यादेश के हक में है वह किसानों के खिलाफ है, तो किस तरह से अकाली दल के नेताओं ने गिरगिट की तरह रंग बदला है, यह साफ तौर पर देखा जा सकता है।

उन्होंने कहा इसी प्रकार से यदि कांग्रेस की बात की जाए तो इस अध्यादेश के लिए चर्चा करने के लिए जो हाई पाॅवर कमेटी बनाई गई थी, उस हाई पावर कमेटी में पंजाब के मुख्यमंत्री और कांग्रेस के बड़े नेता कैप्टन अमरिंदर सिंह खुद शामिल थे और इस अध्यादेश पर अपनी सहमति दी थी। साथ ही साथ पंजाब के वित्त मंत्री मनप्रीत सिंह बादल जो खुद जाकर इस अध्यादेश की सिफारिश करके आए थे। इन लोगों के भी असली चेहरे जनता के सामने खुल कर आ चुके हैं। उन्होंने कहा कि जहां तक बात इस अध्यादेश की  बात है यह कांग्रेस का ही बोया हुआ बीज है, जिसका खामियाजा आज पूरे देश के किसानों को भुगतना पड़ रहा है।

किसानों के विरोध के बाद बादल परिवार और अकाली दल ने यू-टर्न लिया और कह रहे कि इस अध्यादेश से एमएसपी खत्म हो जाएगा- भगवंत मान

प्रेस वार्ता में मौजूद आम आदमी पार्टी के लोकसभा सांसद भगवंत मान ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए बताया कि पिछले दो-तीन महीनों से लगातार बादल परिवार पंजाब के किसानों को इस अध्यादेश पर सहमति जताने के लिए तरह-तरह के हथकंडे अपना रहे थे। कभी नरेंद्र सिंह तोमर को चंडीगढ़ बुलाया, कभी उनकी चिट्ठी दिखाई, कभी प्रकाश सिंह बादल जी से कहलवाया गया कि यह बिल बहुत अच्छा है, किसानों की भलाई के लिए, यह बिल आना चाहिए, कभी हरसिमरत कौर जी ने वीडियो जारी करके कहा कि विरोधी पार्टियां भ्रम फैला रही हैं, यह बिल किसानों के हित का है। जब किसानों ने इसका विरोध किया और बादल परिवार को जमीनी हकीकत पता चली तो गिरगिट को भी शर्मिंदा करने वाला यू-टर्न बादल परिवार और अकाली दल ने लिया। उन्होंने बताया कि सुखबीर सिंह बादल ने लोकसभा में यह कहा था, कि हमसे तो इस बिल के बारे में पूछा ही नहीं गया, जबकि पिछले 3 महीने से पूरा अकाली दल और बादल परिवार किसानों को तरह-तरह के हथकंडे से इस अध्यादेश पर सहमत करने के लिए जद्दोजहद कर रहा था। भगवंत मान ने पत्रकारों को बताया कि अभी कुछ दिन पहले ही प्रकाश सिंह बादल जी कह रहे थे, कि इस अध्यादेश से एमएसपी को कोई खतरा नहीं है और आज सुखबीर सिंह बादल कह रहे हैं की इस अध्यादेश के आने से एमएसपी बर्बाद हो जाएगा, खत्म हो जाएगा। उन्होंने कहा कि मैं बादल परिवार से आग्रह करना चाहता हूं कि कम से कम झूठ बोलते समय तो आपस में सलाह मशवरा कर लिया करो।

जब बिल का विरोध करना था, तब अकाली दल ने अध्यादेश का समर्थन किया और अब किसान सड़क पर उतर आए, तो इस्तीफा देने का ढोंग कर रहे- भगवंत मान

सांसद भगवंत मान ने बताया कि सुखबीर सिंह बादल ने न केवल अध्यादेश के बारे में किसानों से झूठ बोला, बल्कि सदन की कार्यवाही को लेकर भी जनता के समक्ष झूठ बोला। सुखबीर सिंह बादल ने सदन से बाहर आकर कहा कि हमने इस बिल का विरोध किया, जबकि मैं वहीं मौजूद था और ध्वनि मत से यह बिल सदन में पास किया गया। भगवंत मान ने कहा कि पहले तो पूरा बादल परिवार, पूरा अकाली दल इस बिल की सिफारिश करता फिर रहा था और जब किसानों का दबाव देखा तो अब झूठा ढोंग जनता के सामने कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसी खबर सुनने में आई है कि हरसिमरत कौर बादल कैबिनेट मंत्री पद से इस्तीफा देंगी। उन्होंने कहा कि इस बात को सुनकर मुझे पंजाबी की एक कहावत याद आ गई, कि कन की उंगली कटा कर शहीदों में नाम लिखाना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि यदि इस्तीफा देना था तो उस दिन देना चाहिए था, जिस दिन केंद्रीय कैबिनेट में यह अध्यादेश आया था। यदि उस समय यह लोग कैबिनेट की मीटिंग में इस बिल का विरोध करते, मीटिंग से वाकआउट करते और बाहर आकर बताते कि यह बिल किसानों के खिलाफ है, तो माना जाता कि अकाली दल और बादल परिवार किसानों के साथ खड़ा है। जब विरोध करना था, उस समय तो अकाली दल और बादल परिवार ने इस अध्यादेश का समर्थन किया और आज जब किसान सड़कों पर उतर आए तो इस्तीफा देने का ढोंग रच रहे हैं। भगवंत मान ने कहा कि इस सारे प्रकरण के बाद अकाली दल का असली चरित्र जनता के सामने बेनकाब हो गया है।

कांग्रेस दो कश्तियों में सवार, सदन में अध्यादेश का समर्थन कर रही और जनता के सामने विरोध का झूठा नाटक कर रही- भगवंत मान

इस अध्यादेश में कांग्रेस की भूमिका पर बात करते हुए भगवंत मान ने कहा कि मैंने पहले भी बताया था कि अध्यादेश के संबंध में हुई मीटिंग में एक बार वित्त मंत्री मनप्रीत बादल शामिल हुए और दूसरी मीटिंग में मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह खुद शामिल हुए। कैप्टन अमरिंदर सिंह द्वारा बोले गए झूठ का पर्दाफाश करते हुए सांसद भगवंत मान ने कहा कि कैप्टन अमरिंदर सिंह जी ने कहा कि वित्त मंत्री मनप्रीत सिंह बादल ने मुझे बताया ही नहीं कि वह मीटिंग में क्या बोलने वाले हैं। उन्होंने कहा कि इससे बड़ी लापरवाह सरकार कोई हो ही नहीं सकती कि कैबिनेट मंत्री अपने मुखिया को ही नहीं बता रहा कि मीटिंग में आज क्या बोलना है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस दो कश्तियों में सवार होकर चल रही है। सदन में तो अध्यादेश का समर्थन करती है और जनता के सामने अपना चेहरा बचाने के लिए विरोध का झूठा नाटक करती है। भगवंत मान ने कहा कि कांग्रेस और अकाली दल के यू टर्न लेने के पीछे एक बहुत बड़ा कारण है, पंजाब के किसानों ने, पंजाब के लोगों ने अपने गांव के बाहर बड़े-बड़े शब्दों में लिख दिया है, कि जो किसान के हक के साथ खड़ा है, वही इस गांव में घुसने की हिम्मत करे। किसानों के और पंजाब की जनता के इस विरोध से घबराकर कांग्रेस और अकाली दल ने यह यू-टर्न लिया है। उन्होंने कहा कि पहले तो कैप्टन अमरिंदर सिंह जी ने किसानों के खिलाफ सैकड़ों एफआईआर दर्ज करवाई, जो किसान विरोध कर रहे थे उनके खिलाफ केस दर्ज करवाए और जब जनता का और किसानों का बढ़ता विरोध देखा तो अब झूठी सहानुभूति जताते हुए कह रहे हैं कि सभी केस वापस लिए जाएंगे।

पंजाब में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद न किसानों का कर्जा माफ हुआ, न किसी को नौकरी मिली और न किसानों की आत्महत्याएं रुकीं- भगवंत मान

सांसद भगवंत मान ने कहा कि आज जब सदन के पटल पर यह बिल रखा जाएगा तो एक बार फिर अकाली दल और कांग्रेस द्वारा घड़ियाली आंसू बहाए जाएंगे, झूठा विरोध करने का ढोंग किया जाएगा। सदन के भीतर तो सहमति जताते हैं और सदन के बाहर फिर से विरोध करने का जूठा स्वांग रचा जाएगा। उन्होंने कहा कि यदि आप कांग्रेस द्वारा बनाई गई मोंटी सिंह आहलूवालिया कमेटी की सिफारिशें देखें, तो वह भी तमाम किसानों के खिलाफ हैं, किसानों को मिलने वाली सब्सिडी के खिलाफ हैं। कैप्टन अमरिंदर सिंह जी ने अपने मेनिफेस्टो मैं भी कहा था कि हम किसानों का कर्जा माफ करेंगे, घर घर नौकरी देंगे और जो किसान आत्महत्या कर रहे हैं, वह आत्महत्याए बंद होंगी। पंजाब में कांग्रेस की सरकार बने हुए कई साल बीत गए हैं, परंतु ना तो किसानों का कर्जा माफ हुआ, ना घर घर नौकरी मिली और ना ही किसानों की आत्महत्याएं रुकीं। जब कैप्टन अमरिंदर साहब ने पंजाब की जनता से, पंजाब के किसानों से किए हुए अपने वादे को पूरा नहीं किया तो अब किस मुंह से वह पंजाब की जनता के मसीहा बनने की बात कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि मैं आप सबको बता देना चाहता हूं कि मैं इस बिल का पुरजोर विरोध करूंगा। आम आदमी पार्टी पहले भी किसानों के साथ खड़ी थी, आज भी किसानों के साथ खड़ी है और आगे भी हमेशा किसानों के साथ खड़ी रहेगी।

सांसद भगवंत मान ने कहा कि यह दोनों पार्टियां एक ही जैसी है, अंदर से कुछ और तथा बाहर से कुछ और। उन्होंने कहा क्योंकि केंद्र सरकार के पास लोकसभा में बहुमत है, तो लोकसभा में यह प्रस्ताव पास होना ही है। परंतु यदि सही मायने में अकाली दल और कांग्रेस किसानों की हितेषी हैं तो मिलकर राज्यसभा में इस बिल का विरोध करें। क्योंकि राज्यसभा में केंद्र सरकार के पास बहुमत नहीं है, तो राज्यसभा में इस बिल को रोका जा सकता है।

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