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दिल्ली की सरकारी स्कूलों में चल रही ऑनलाइन एवं सेमी ऑनलाइन शिक्षा की समीक्षा शुरू

July 25, 2020 11:29 PM

नई दिल्ली: उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने आज दिल्ली के सरकारी स्कूलों में ऑनलाइन शिक्षा के प्रयोग पर शिक्षकों और अभिभावकों के साथ संवाद किया। उन्होंने दो जिलों के दो सरकारी स्कूलों में जाकर दिल्ली सरकार द्वारा कराई जा रही ऑनलाइन शिक्षा को बेहतर बनाने के लिए सुझाव भी मांगे। इस दौरान श्री सिसोदिया ने पेरेंट्स टीचर मीटिंग भी अनलाइन कराने का सुझाव दिया। संवाद में अधिकांश पेरेंट्स में ऑनलाइन शिक्षा के अनुभव को काफी उपयोगी बताते हुए कहा कि शिक्षकों ने बच्चों का काफी सकारात्मक तरीके से मार्गदर्शन किया। यह संवाद एसकेवी प्रशांत विहार तथा पीतमपुरा में आयोजित हुआ।

स्कूली शिक्षकों एवं पेरेंट्स से संवाद कर लिया फीडबैक, ऑनलाइन सिर्फ प्राइवेट में क्यों, हमने सरकारी स्कूलों में कर दिखाया: मनीष सिसोदिया

संवाद के दौरान श्री सिसोदिया ने कहा कि जब लॉकडाउन हुआ, तो हमने ऑनलाइन पढ़ाई शुरू की। उस वक्त सबको लगता था कि ऑनलाइन शिक्षा सिर्फ प्राइवेट स्कूलों में संभव है। सरकारी स्कूलों के पेरेंट्स के पास साधन नहीं हैं, और टीचर्स की भी ट्रेनिंग नहीं है। लेकिन हमारे शिक्षा विभाग के अधिकारियों और शिक्षकों ने नए तरीके के प्रयोग किया। पेरेंट्स और स्टूडेंट्स ने भी भरपूर साथ दिया। देश में ऐसा पहली बार हुआ है जब सरकारी स्कूलों में इतने बड़े पैमाने पर टेक्नॉलजी की सहायता से पढ़ाई की गई हो। व्हाट्सएप्प के माध्यम से वर्क्शीट और जिन बच्चों के पेरेंट्स के पास व्हाट्सप्प नहीं है उन्हें स्कूल में बुलाकर अगले एक हफ्ते के लिए वर्कशीट देना एक नायाब प्रयोग ही। इस तरह हर बच्चा पढ़ाई से जुड़ सका – वो जिसके पास स्मार्ट फोन है, वो भी और जिसके पास नहीं है वो भी। इसी तरह 12वीं के लगभग सभी बच्चे लाइव ऑनलाइन क्लास से जुड़ चुके हैं, जो दिल्ली सरकार के टीचर्स रोज कराते हैं। इन सभी बच्चों को स्कूलों द्वारा फोन और एमएमएस द्वारा भी मार्गदर्शन दिया जाता है।

देश में पहली बार इतने बड़े स्तर पर दिल्ली के सरकारी स्कूलों में टेक्नॉलजी की मदद से शिक्षा का प्रयोग हुआ, जिनके पास साधन नहीं, उनके लिए सेमी-ऑनलाइन प्रयोग किया गया: उपमुख्यमंत्री सिसोदिया

श्री सिसोदिया ने कहा कि हमारे लिए यह कहना बेहद आसान था कि जिनके पास साधन हों, उन्हीं के लिए ऑनलाइन शिक्षा है। लेकिन जिनके पास साधन नहीं, हमें उनको भी साथ लेकर चलना है। एक समय था जब धर्म और जाति के आधार पर शिक्षा मिलती थी। उसके बाद पैसे के आधार पर शिक्षा मिलने लगी। लेकिन जिसके पास एक भी पैसा न हो, उनके लिए भी हमने दिल्ली में शानदार व्यवस्था कर दी। अब ऐसा न हो जाए कि जिनके पास स्मार्ट फोन नहीं, वे शिक्षा में पीछे छूट जाएं। इसीलिए हमने “सेमी-ऑनलाइन” शिक्षा पर भी पूरा ध्यान दिया।

श्री सिसोदिया ने कहा कि जब कोरोना महामारी आई, तो दिल्ली के स्कूलों को भी शेल्टर होम में बदलना पड़ा। हमारे शिक्षकों ने सच्चे समाज सेवकों की तरह काम किया। उन्होंने कहा कि हम काफी कठिन दौर से गुजरे हैं। लेकिन सबसे बड़ा संकट स्टूडेंट्स के लिए है। हम सब कुछ खुलने के इंतजार में हाथ पर हाथ रखकर नहीं बैठ सकते। हमें किसी भी तरह बच्चों की पढ़ाई का उपाय करना था और हमनें किया।

अन्य नुकसान की भरपाई हो जाएगी, लेकिन शिक्षा के नुकसान की भरपाई असंभव, इसलिए अलग-अलग माध्यम से शिक्षा जारी रहनी चाहिए, क्योंकि कोरोना का वैक्सीन बन जाएगा, लेकिन शिक्षा के नुकसान का कोई वैक्सीन नहीं बन सकता: सिसोदिया

श्री सिसोदिया ने कहा कि कोरोना का वैक्सीन बन जाएगा, लेकिन शिक्षा में नुकसान की भरपाई किसी वैक्सीन से नहीं हो सकती, इसलिए हम अपने अन्य खर्च कम करके किसी भी तरह बच्चों की पढ़ाई जारी रखें। अगर पढ़ाई में नुकसान हुआ तो यह बच्चे या परिवार का नहीं, बल्कि पूरे देश का नुकसान होगा। हमारी समझदारी की पहचान यह है कि कितनी भी मुश्किल क्यों न हो, हम अपने बच्चों को जरूर पढ़ाएंगे। श्री सिसोदिया ने पेरेंट्स से मिले सहयोग के लिए धन्यवाद देते हुए कहा कि आपने अपने घर को स्कूल बना दिया, यह बड़ी बात है।

श्री सिसोदिया ने कहा कि क्लास रूम जैसा आनंद ऑनलाइन में नहीं मिल सकता। यह उसी तरह है जैसे कश्मीर जाने के बदले उसे फिल्म में देखना। लेकिन अगर क्लास संभव नहीं, तो ऑनलाइन के जरिए हम शिक्षा जारी रखें। मौजूदा संकट में सभी पेरेंट्स और टीचर्स को पूरी कोशिश करनी होगी कि स्टूडेंट्स के नुकसान को कम किया जाए।

श्री सिसोदिया ने कहा कि हमने फिनलैंड में देखा कि बच्चों को फेसबुक पर असाइनमेंट दिया जाता है। बच्चे फेसबुक पर होमवर्क करते हैं। बच्चों को फेसबुक पर जाने का शौक है। अगर फेसबुक में अन्य चीजें देखने के बदले होमवर्क करें, तो एक साथ दोनों काम हो जाएगा, ऐसी सोच है। श्री सिसोदिया ने कहा कि उस वक्त हमने सोचा नहीं था कि हम भी सोशल मीडिया से पढ़ाई कराएंगे। लेकिन आज मजबूरी में ही सही, इस प्रयोग के जरिए हमने बच्चों के नुकसान को काफी कम किया है।

कभी 90% रिजल्ट की सोचते थे, अब 98% भी कम लगता है : सिसोदिया

श्री सिसोदिया ने कहा कि हम अपना काम अच्छी तरह करें, यही सबसे बड़ी देशभक्ति है। आप अच्छे पेरेंट बनेंगे तो बच्चे भी अच्छे नागरिक बनेंगे। उन्होंने कहा कि पहले  सरकारी स्कूलों में 85 फीसदी रिजल्ट आते थे। आज पांच साल में हम 98 प्रतिशत तक पहुंच गए हैं। अब तो यह भी कम लगता है। आप सबकी मदद से हमें 100 फीसदी का प्रयास करना है। हमारे शिक्षक काफी अच्छे हैं। यह बात हर तरफ से प्रमाणित हो रही है। संवाद के दौरान शिक्षकों ने बताया कि उस स्कूल के 96 प्रतिशत स्टूडेंट्स ने ऑनलाइन शिक्षा हासिल की है। शेष बच्चों से संपर्क का प्रयास किया जा रहा है। इस दौरान शिक्षकों और अभिभावकों ने विस्तार से अपने अनुभव शेयर किए। एक अभिभावक ने कहा कि स्कूल के टीचर्स ने बच्चों पर हंड्रेड परसेंट मेहनत की है।

अगले कुछ दिनों में हर जिले के स्कूलों में ऐसी समीक्षा की योजना...

इस दौरान हैप्पीनेस कक्षाओं को भी शिक्षकों और अभिभावकों ने काफी अच्छा अनुभव बताया। श्री सिसोदिया ने घर पर बच्चों को मेडिटेशन कराने की सलाह देते हुए कहा कि इससे बच्चों में बेचैनी कम होगी तथा वह ध्यान केंद्रित कर पाएंगे। श्री सिसोदिया ने कहा कि दिल्ली के सरकारी स्कूलों में लगभग 15लाख बच्चे हैं तथा अन्य सभी स्कूलों को मिलाकर दिल्ली में लगभग 42लाख बच्चे स्कूलों में हैं। इनकी जिंदगी में कोई कमी न रह जाए, इसके लिए दिल्ली सरकार पूरी तरह से प्रयासरत है। संवाद के दौरान सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों का पूरा ध्यान रखा गया। हर जिले के विभिन्न स्कूलों में ऑनलाइन शिक्षा की समीक्षा का सिलसिला जारी रहेगा।

झलकियां-

एक अभिभावक ने कहा- मेरा बच्चा पहले प्राइवेट स्कूल में था, उसे हमने इस सरकारी स्कूल में लाकर साइंस में एडमिशन कराया। सारे शिक्षक काफी अच्छा गाइड कर रहे हैं। जब परिवार का मुखिया ही अच्छा हो, आप इतने अच्छे हों, तो सब कुछ अच्छा होता है।

एक महिला ने कहा- मेरे तीन बच्चे हैं और तीनों को ऑनलाइन क्लास बहुत अच्छी लगती है। मेरे पास एक ही मोबाइल है। तीनों का झगड़ा होता है कि मैं पढ़ूंगा, मैं पढूंगा, इसका क्या उपाय हो?

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