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"सेवाओं पर प्रतिबंध लगाने का कोई मतलब ही नहीं बनता हैं"-गडकरी जी का ये कैसा बयान?

December 09, 2014 01:49 PM

अपनी ही सरकार द्वारा बिना लाइसेंस के चल रहीं वेब आधारित टैक्सी सेवाओं के संचालन पर प्रतिबंध लगाने के सुझाव दिए जाने के बाद भी, केन्द्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने आज कहा कि एक प्रतिबंध लागू करने का कोई मतलब नहीं बनता है| इसके बजाय नियमों में सुधार करने की आवश्यकता है।

उन्होंने कहा "सेवाओं पर प्रतिबंध लगाने का कोई मतलब ही नहीं बनता हैं, कल को यदि एक बस में कुछ होता है तो हम उस पर प्रतिबंद नहीं लगा सकते, इस प्रणाली को बदलने की जरूरत है| चालक लाइसेंस देने की प्रणाली दोषपूर्ण है और एक नई डिजिटल प्रणाली है तैयार की जाएगी, हर किसी का ट्रैक रिकॉर्ड देखा जा सकता है|

सबसे बड़ा प्रश्न तो खुद परिवहन विभाग पर उठता है की आखिर इस कंपनी का “रेडियो टैक्सी” के नाम पर सञ्चालन होने कैसे दिया गया? कौन है इसका ज़िम्मेदार? क्यूँ इतने सालों बाद अब जाकर समाचार पत्रों में “सार्वजानिक सूचना” के ज़रिये पंजीकृत रेडियो टैक्सी कंपनियों के बार में बताया गया है?

” गडकरी जी, आपको बता देना चाहेंगे की पहले से ही ड्राइविंग लाइसेंस और बैज इस तरह बनते हैं की उनके ज़रिये सारी जानकारी हांसिल की जा सकती है, और यदि यह व्यवस्था दोषपूर्ण है तो परिवहन विभाग अब किसके नियंत्रण में है? अगर उबेर कैब काण्ड ना होता तो क्या लाइसेंस प्रणाली आपको दोषपूर्ण नहीं लगती? जहाँ तक बात रही कैब सर्विस प्रतिबंधित करने की तो आपको यह ज्ञात होना चाहिए की इस कंपनी का पिछला रिकॉर्ड कैसा रहा है| सबसे बड़ा प्रश्न तो खुद परिवहन विभाग पर उठता है की आखिर इस कंपनी का “रेडियो टैक्सी” के नाम पर सञ्चालन होने कैसे दिया गया? कौन है इसका ज़िम्मेदार? क्यूँ इतने सालों बाद अब जाकर समाचार पत्रों में “सार्वजानिक सूचना” के ज़रिये पंजीकृत रेडियो टैक्सी कंपनियों के बार में बताया गया है? अगर इस तरह की धोकेबाज़ कंपनियों को बंद न करके नियमों में ही बदलाव करते रहे तो कैसे सुशासन होगा? क्या ऐसे ही आयेंगे अच्छे दिन?

http://www.firstpost.com/india/delhi-live-no-sense-in-banning-web-based-cab-services-says-nitin-gadkari-1838045.html

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