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Delhi Election

LG के डंडे से चलाना चाह रहे हैं दिल्ली में चुनी हुई सरकार को मोदी

May 22, 2015 01:08 PM
दिल्ली में 15 मई से अधिकारियों के ट्रांसफर-पोस्टिंग पर जारी विवाद में आज केंद्र सरकार ने दखल देते हुए दिल्ली सरकार को नोटिफिकेशन भेजा है।

केंद्रीय गृहमंत्रालय द्वारा शुक्रवार को जारी इस गजट में दिल्ली के मुख्यमंत्री और एलजी के अधिकारों को लेकर चल रहे विवाद पर केंद्र सरकार ने अपना रूख साफ कर दिया है।

इस गजट में गृहमंत्रालय ने साफ कर दिया है कि दिल्ली में केंद्र सरकार के अधीन आने वालों मामलों में नियुक्ति व हस्तांतरण का अंतिम अध‌िकार एलजी के पास है।

केंद्र सरकार के अधीन आने वाले पब्लिक ऑर्डर, पुलिस, जमीन और सेवा के क्षेत्र हैं। एलजी राष्ट्रपति के निर्देश के अनुसार समय-समय पर इन मामलों पर अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करते हैं।

गजट में ये बात भी कही है कि इन चारों क्षेत्रों में यदि एलजी चाहें और जहां उन्हें उचित लगे तो वो सीएम से राय-सलाह कर सकते हैं।

गजट में साफ कहा गया है कि दिल्ली सरकार की भ्रष्टाचार निरोधी शाखा केंद्र सरकार के कर्मचारियों और उनकी कार्यप्रणाली में हस्तक्षेप नहीं कर सकती।

राज्यपाल और दिल्ली सरकार के रिश्तों को लेकर पहले भी ऐसा नोटिफिकेशन 24 सितंबर 1998 को जारी किया गया था।
इस नोटिफिकेशन के जारी होने से कुछ समय पहले ही दिल्ली के डिप्टी सीएम मनीष‌ सिसोदिया ने कुछ ट्वीट कर ऐसे ही किसी गजट के आने की उम्मीद जताई थी।

उन्होंने अपनी ट्वीट में लिखा था कि, 'खबर है कि MHA के साथ बैठकर कुछ भ्रष्ट बाबू फतवा तैयार करा रहे हैं कि दिल्ली में ट्रांसफर-पोस्टिंग LG के हाथ में ही हो।'

क्या MHA कुछ भ्रष्ट बाबुओं को बढ़ाने के लिए संविधान को ताक पर रखकर ऐसा नियम बनाएगा। जमीन, लॉ एंड ऑर्डर, पुलिस को छोड़कर सभी अधिकार संविधान ने दिल्ली सरकार को दे रखे हैं।

दिल्ली में अधिकारियों की ट्रांसफर-पोस्टिंग और उनसे काम लेना दिल्ली सरकार की जिम्मेदारी है। इन चार मामलों में भी CM से बिना सलाह लिए नियुक्ति का अधिकार LG के पास नहीं है।
 
सिसोदिया ने आगे ट्वीट किया कि, 'दिल्ली में सीपी, सीएस, गृह सचिव, भूमि सचिव की नियुक्ति एलजी के हाथ में है लेकिन वो भी CM की सलाह लेकर।'

इन चार मामलों में भी CM से बिना सलाह लिए नियुक्ति का अधिकार LG के पास नहीं है। संविधान के अनुसार बाकी सभी ट्रांसफर-पोस्टिंग का अधिकार दिल्ली सरकार के पास है।

अब देखना है कि संविधान जीतता है या कुछ भ्रष्ट अधिकारियों और नेताओं का गठजोड़। अगर ऐसा आदेश आता है तो साफ है कि मोदी जी और राजनाथ जी भ्रष्टाचार और ट्रांसफर-पोस्टिंग इंडस्ट्री के सामने घुटने टेक रहे हैं।

 

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