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प्रवासी मजदूरों की समस्या पर AAP सांसद संजय सिंह जी का बयान

May 20, 2020 07:37 AM

नई दिल्ली: आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने एक बयान जारी कर कहा कि दिल्ली सरकार ने जो  बाजारों को खोलने और अन्य कई अहम फैसले लिए हैं, वह सामान्य जनजीवन को दोबारा से पटरी पर लाने के लिए एक सही कदम है, क्योंकि अर्थव्यवस्था को धीरे-धीरे खोलना ही एकमात्र रास्ता है, वरना जितने लोग कोरोना से नहीं मरेंगे, उससे कहीं ज्यादा लोग भूख से मर जाएंगे। सारी व्यवस्था को ठप करके देश को आगे बढ़ाना नामुमकिन है।

उन्होंने कहा कि आज देश के कोने-कोने से एक बड़ी संख्या मजदूरों की ऐसी है, जो इस बीमारी के कारण अपने घर जाना चाहती है। साथ ही साथ एक बहुत बड़ी संख्या ऐसे गरीब-मजदूर लोगों की भी है, जिनके सामने आज रोजी-रोटी और रोजगार न होने का संकट है। इसके कारण भी वह लोग अपने घर जाना चाहते हैं। इसीलिए सरकार को ऐसे लोगों के जनजीवन को पटरी पर लाने के लिए रोजगार के साधन खोलने पड़ेंगे। अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए लॉक डाउन को धीरे- धीरे खोलना पड़ेगा।

उन्होंने कहा कि दिल्ली की सड़कों पर जगह-जगह भारी संख्या में मजदूर पैदल चले जा रहे हैं। यह मजदूर हरियाणा, पंजाब, राजस्थान से भारी संख्या में दिल्ली होते हुए अपने घरों की तरफ चले जा रहे हैं। दिल्ली में जगह-जगह मजदूरों की भीड़ इकट्ठा हो जाना कोई पहली घटना नहीं है, परंतु सबसे बड़ा प्रश्न यह उठता है, कि क्या केंद्र सरकार की इन मजदूरों के प्रति कोई जिम्मेदारी नहीं बनती? क्या केंद्र सरकार ने इन मजदूरों को तपती धूप में यूं ही सड़क पर मरने के लिए छोड़ दिया है? जगह-जगह से कभी रेल एक्सीडेंट में मजदूरों के मारे जाने की खबर आती है, कभी सड़क दुर्घटना में मजदूरों के मारे जाने की खबर आती है। कल बाराबंकी में कई मजदूरों की जान चली गई। कहीं सड़क पर ही कोई महिला बच्चे को जन्म दे रही है। कहीं छोटे-छोटे मासूम बच्चे सैकड़ों किलोमीटर पैदल भूखे प्यासे चलते जा रहे हैं। लेकिन केंद्र में बैठी भाजपा सरकार बड़ी बेशर्मी के साथ यह सब कुछ होते हुए चुपचाप देख रही है।

सांसद संजय सिंह ने कहा कि केवल दिल्ली में ही लगभग 4लाख मजदूरों ने घर जाने के लिए अपना नाम पंजीकृत करा लिया है। इन 4लाख मजदूरों को भेजने के लिए लगभग 350ट्रेनों की आवश्यकता है। परंतु केंद्र सरकार ने पूरे देश के मजदूरों और प्रवासियों को उनके घर पहुंचाने के लिए मात्र 100श्रमिक ट्रेनें चलाई हैं। इससे साफ जाहिर होता है कि विदेशों में बैठे अपने धनवान मित्रों के लिए तो केंद्र की भाजपा सरकार ने तमाम हवाई जहाजों का बंदोबस्त कर लिया, परंतु भारत के गरीब मजदूरों की केंद्र सरकार को कोई चिंता नहीं है। गरीब मजदूर के लिए केंद्र सरकार ने कोई तैयारी नहीं की। कोई बंदोबस्त नहीं किया। केंद्र सरकार को हवाई जहाज में चलने वालों की तो चिंता है, परंतु हवाई चप्पल पहनकर चलने वाले गरीब मजदूर की कोई चिंता नहीं है। संजय सिंह ने कहा कि मैं बार-बार केंद्र सरकार से यही प्रश्न कर रहा हूं कि क्यों नहीं एक साथ पूरे देश में ट्रेनें चलाकर इन मजदूरों को उनके घर पहुंचाया जा रहा है?

उन्होंने कहा कि बहुत शर्मनाक बात है कि एक तरफ तो भारतीय जनता पार्टी ने इन गरीब मजदूरों को मरने के लिए छोड़ दिया है, वहीं दूसरी ओर भाजपा के एक बड़े नेता बीएल संतोष कहते हैं कि केजरीवाल जी मजदूरों का ढेर लगा देंगे। क्या गरीब मजदूर कोई सामान है? गरीब मजदूरों का इस तरह से अपमान करते हुए भाजपा के नेताओं को शर्म आनी चाहिए। उन्होंने कहा कि भाजपा का गरीब विरोधी चेहरा आज पूरे देश के सामने बेनकाब हो रहा है। जहां भी भाजपा शासित राज्य हैं, चाहे वह गुजरात हो, मध्य प्रदेश यूपी का बॉर्डर हो, हरियाणा हो, बिहार हो, हर जगह भाजपा की सरकार गरीब मजदूरों पर पुलिस द्वारा लाठी बरसा रही है। जो गरीब मजदूर भूख प्यास की मार से पहले ही मरे हुए हैं, भाजपा की सरकार उनको डंडे से मार रही है।
उन्होंने कहा यह समय राजनीतिक पार्टियों के आपसी वाद विवाद का नहीं है। यह समय निर्णय लेने का है और निर्णय लेना केंद्र में बैठी भाजपा सरकार के हाथ में है। यदि भाजपा चाहे तो 1दिन के भीतर इन गरीब मजदूरों को उनके घरों तक पहुंचाया जा सकता है। क्योंकि भारतीय रेलवे की क्षमता है कि वह 1दिन में 2.30करोड़ व्यक्तियों को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचा सकती है। परंतु इस सबके बावजूद केंद्र सरकार कभी 100श्रमिक ट्रेन चलाने का ऐलान करती है, कभी 15श्रमिक ट्रेन चलाने का ऐलान करती है। अर्थात केंद्र में बैठी भाजपा सरकार ने महीनों का प्लान तैयार किया है इन गरीब मजदूरों को उनके घर तक पहुंचाने का, चाहे तब तक यह गरीब मजदूर तपती धूप में सड़कों पर पैदल चलते हुए भूखे प्यासे मरते रहें।

संजय सिंह ने कहा कि विपक्षी पार्टियों से वाद-विवाद करने की बजाए केंद्र सरकार को कोई ठोस निर्णय लेना चाहिए। बेहद ही आसान प्रक्रिया के तहत इन सभी मजदूर प्रवासियों को उनके घर तक पहुंचाया जा सकता है, परंतु केंद्र सरकार की मंशा ही नहीं है। एक सुझाव देते हुए संजय सिंह ने कहा कि तमाम मजदूरों को एक बड़े स्टेडियम में इकट्ठा किया जाए और सभी की जांच करके उनकी जांच रिपोर्ट उनको सौंप दी जाए और बसों के माध्यम से उनको रेलवे स्टेशन तक पहुंचाया जाए। पूरे देश के लिए एक साथ ट्रेनें चलाई जाएं और सभी मजदूरों को उनके घरों तक पहुंचाया जाए। परंतु केंद्र सरकार इन मजदूरों को सही सलामत उनके घर तक पहुंचाना ही नहीं चाहती। उन्होंने कहा कि लॉक डाउन करके यदि केंद्र सरकार सोचती है कि इन मजदूरों को रोक लिया जाएगा, तो यह केंद्र सरकार की भूल है। ऐसी संकट की घड़ी में सभी मजदूर प्रवासी अपने अपने घर जाना चाहते हैं ।

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