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श्रम कानून में किए बदलाव के विरोध में SVS ने किया सत्याग्रह, अन्याय के खिलाफ आवाज उठाई

May 16, 2020 08:38 AM

जयपुर। श्रमिक विकास संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष गोपाल राय के आह्वान पर कल शुक्रवार को देशव्यापी एक दिवसीय सत्याग्रह कर हाल ही में प्रदेश सहित विभिन्न प्रदेशों की सरकारों द्वारा श्रमिकों के खिलाफ किए गए कानून में बदलाव का विरोध किया। संगठन पदाधिकारियों ने विरोध करते हुए कहा कि सरकार द्वारा श्रम कानून में किए गए बदलाव के कारण यह सत्याग्रह देशभर में कार्यकर्ताओं द्वारा किया गया।

श्रमिक विकास संगठन के राजसमंद जिला अध्यक्ष पप्पूलाल कीर और अजमेर उपाध्यक्ष निलेश बुराड़ ने बताया कि कोरोना संकट के कारण लॉकडाउन की वजह से उद्योग-धंधे ठप हैं। इन उद्योगों को पटरी पर लाने की आड़ में देश के 6राज्यों की सरकारें श्रमिक विरोधी बदलाव कर चुकी हैं। श्रमिक विकास संगठन के सभी पदाधिकारियों ने अपने-अपने आवास पर ही एक दिवसीय सत्याग्रह उपवास किया। कीर ने कहा है कि उन्होंने नेनपुरिया(नमाना) में उपवास किया।

कीर ने कहा है कि शबनम खान, प्रशांत जायसवाल, मोहम्मद हनीफ, हेमराज महावीर, सुरेश सेन, फिरोज हुसैन और हेमेंद्र मेहता ने अपने-अपने आवास पर उपवास कर श्रमिक कानून में किए गए बदलाव का पूर्णत विरोध किया। श्रमिक विकास संग़ठन, सरकार के द्वारा मजदूर विरोधी कानून संशोधन के विरोध में पूरे देश में एक दिवसीय उपवास रखकर श्रमिक विरोधी काला कानून के वापस लेने की मांग को लेकर श्रमिक विकास संगठन ने देशभर में विरोध किया। श्रम कानूनों में बदलाव की शुरुआत राजस्थान की गहलोत सरकार ने काम के घंटों में बदलाव को लेकर किया है। जिस प्रकार श्रम कानून में संशोधन किया है उससे यह स्पष्ट प्रतीत होता है कि राज्य सरकार का यह निर्णय पूर्णता श्रमिक विरोधी है। और इसे लागू होने से श्रमिकों के अधिकारों का हनन होगा।

अन्याय के खिलाफ आवाज उठाई है, यदि सरकार इसके बाद भी इसमें बदलाव नहीं करती है तो आंदोलन तेज किया जाएगा

कानून में बदलाव की शुरुआत राजस्थान सरकार ने काम के घंटों में बदलाव को लेकर किया सरकार द्वारा औद्योगिक विवाद और कारखाना अधिनियम सहित प्रमुख अधिनियम में संशोधन किए हैं। ट्रेड यूनियन एक्ट 1926 को 3साल के लिए रोक दिया गया। सरकार कह रही है कि कोरोना के चलते उद्योग सेक्टर अधिक दबाव में हैं। जिस प्रकार सरकार ने श्रमिक नियमों में उद्योगों को बढ़ावा देने का हवाला देते हुए नियमों को शिथिल किया है, उससे श्रमिक वर्ग पूरी तरह उद्योगपतियों व ठेकेदारों के जरिए उद्योग बढ़ावा देने के लिए श्रमिकों से 8घंटे की बजाय शिफ्ट को 12घंटे का कर दिया है। उद्योगपतियों को यह छूट दी जा रही है कि वह सुविधा के अनुसार शिफ्ट में भी बदलाव कर सकते हैं, और उक्त नियमों में बदलाव को लेकर एक ही दिन का सत्याग्रह कर श्रमिकों के साथ होने वाले अन्याय के खिलाफ आवाज उठाई है। यदि सरकार इसके बाद भी इसमें बदलाव नहीं करती है तो आंदोलन तेज किया जाएगा। मालूम हो कि भाजपा शासित राज्य गुजरात, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश राज्यों की सरकारों ने भी श्रम कानूनों में बदलाव कर दिया है। इसका राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े संगठन ने भी विरोध किया है।

 
 

 
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