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DyCM सिसोदिया ने HRD मंत्री पोखरियाल से कहा- 10-12वीं की परीक्षा कराना संभव नहीं, आंतरिक परीक्षा के आधार पर पास किए जाएं छात्र

April 29, 2020 08:50 AM

नई दिल्ली: ऑनलाइन शिक्षा, ऐकडेमिक कैलेंडर इत्यादि जैसे शिक्षा के कुछ प्रमुख बिंदुओं पर चर्चा करने के लिए कल मंगलवार(28अप्रैल) को केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री रमेश पोखरियाल ‘निशांक’ ने देश के सभी प्रदेशों के शिक्षा मंत्रियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के द्वारा मीटिंग बुलायी, जिसमें शामिल हुए दिल्ली के शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया ने भी कुछ अहम मुद्दों पर बल दिया।

दिल्ली सरकार पिछले 3-4हफ़्तों से तकनीक का इस्तेमाल कर लाखों बच्चों तक शिक्षा पहुंचा रही है। शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया ने सभी को सम्बोधित करते हुए कहा कि स्वास्थ्य की दृष्टि से आज नहीं तो कल हम कोरोना से बाहर निकल ही जाएंगे, लेकिन इसका शिक्षा और अर्थ व्यवस्था पर जो प्रभाव पड़ेगा वह दूरगामी होगा। इसलिए हम सब शिक्षा मंत्रियों की ज़िम्मेदारी बनती है कि इससे कम से कम नुकसान हो, इसके लिए हम अभी से तैयार रहें।

उपमुख्यमंत्री व शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया ने दिए कई बड़े सुझाव-

— जिस तरह 9वीं और 11वीं कक्षा के लिए इंटरनल असेसमेंट और अब तक हुई परीक्षा के आधार पर बच्चों को मार्क्स देने का निर्णय लिया है, वही निर्णय 10वीं और 20वीं के बच्चों के लिए भी लिया जाए। ऐसा इसलिए, क्योंकि निकट भविष्य में भी सोशल डिस्टन्सिंग की वजह से बची हुई परीक्षाएं कराना संभव नहीं होगी। इसलिए इस मुद्द्दे पर अनिश्चितता ख़त्म करते हुए तुरंत निर्णय लेने चाहिए। दिल्ली देश का एकमात्र ऐसा प्रदेश है, जिसका अपना बोर्ड नहीं है लिहाज़ा CBSE ही उसका बोर्ड है। अतः CBSE को दिल्ली के सुझाव पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।

— IIT NEET यूनिवर्सिटी प्रवेश जैसी सभी परीक्षाएं कराना आगे भी मुश्किल होगा। बच्चों का वर्ष ख़राब ना हो, उन्हें तनाव न हो, उसके लिए 12वीं के छात्रों को उनके मार्क्स पर इस साल मेरिट के हिसाब से एडमिशन दिए जाए।

— इस साल के सीबीएसई व NCERT सिलेबस में 30% की कटौती की जाए और अगले साल के सीबीएसई बोर्ड इग्ज़ाम, आईआईटी जेईई, नीट यूनिवर्सिटी भी उसी हिसाब से हों।

कोरोना के दौर में दिल्ली में टेक्नॉलजी के माध्यम से बच्चों तक शिक्षा पहुँचाने के प्रयासों के बारे में बताते हुए उपमुख्यमंत्री व शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा कि बहुत से बच्चों के घर में स्मार्टफ़ोन नहीं होते। दिल्ली में भी 68% बच्चों के पास अभी स्मार्टफ़ोन इसलिए हैं क्योंकि उनके माता-पिता घर पर हैं। शिक्षा मंत्री ने केंद्र सरकार से अनुरोध किया कि दूरदर्शन और ऑल इंडिया रेडियो पर दिल्ली सरकार को समय मिल पाए, जिससे कि दिल्ली के सरकारी स्कूलों के टीचर एलेमेंटरी, सेकंडेरी और हायर सेकंडेरी शिक्षा की इंटरैक्टिव कक्षाएं लें और बच्चे उसी lesson प्लान के आधार पर पढ़ाई कर सकें, जो उनके स्कूल में फ़ॉलो किया जाता है।

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