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भाजपा ने डाला महंगी शिक्षा का बोझ, सीबीएसई स्कूल में 10वीं और 12वीं के फीस बढ़ी - मनीष सिसोदिया

January 01, 2020 11:46 PM

नई दिल्ली - भाजपा हमेशा से महंगी शिक्षा की पक्षधर रही है। यह इस बात से प्रमाणित होता है कि भाजपा के दिल्ली नेताओं के इशारे पर सीबीएसई ने दसवीं और बारहवीं के परीक्षा शुल्क में चार गुना तक की बढ़ोतरी कर दी। यह बढ़ोतरी तब की गई जब अरविंद केजरीवाल सरकार ने दिल्ली के सरकारी स्कूलों के बच्चों की फीस जमा करने का निर्णय लिया। हालांकि, बढ़ोतरी के बाद भी दिल्ली सरकार अपने निर्णय पर कायम है, वह फीद दे रही है। लेकिन, भाजपा के निर्णय का नुकसान निजी स्कूलों में पढ़ रहे बच्चों और उनके परिवार को हुआ। वह भाजपा को अभी माफ नहीं करेंगे। यह कहना है दिल्ली के शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया का। उन्होंने यह भी कहा कि दिल्ली में चुनाव मुद्दों पर होगा और यहां भाजपा का पुराना टेप नहीं चलेगा। 

आप पार्टी मुख्यालय में हुई प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी की तमाम नीतियां शिक्षा के खिलाफ है, मैं भारतीय जनता पार्टी से पूछना चाहता हूं कि वो शिक्षा को महंगा क्यों रखना चाहती है? और भाजपा ऐसा क्यों नहीं चाहती कि दिल्ली और देश के बच्चों को अच्छी और सस्ती शिक्षा मिले?
उन्होंने कहा कि जहां एक ओर दिल्ली की आम आदमी पार्टी सरकार बच्चों के लिए अच्छी और सस्ती शिक्षा मुहैया कराने के लिए युद्ध स्तर पर काम कर रहे है, तो ऐसे में भारतीय जनता पार्टी के दिल्ली इकाई के नेता क्यों दिल्ली के बच्चों की अच्छी और सस्ती शिक्षा की राह में रोड़े अटकाने का काम कर रहे है? उन्होंने कहा कि मेरे यह सभी प्रश्न भाजपा के शीर्ष नेतृत्व से भी है और भाजपा के दिल्ली इकाई के नेतृत्व से भी है। मुझे उम्मीद है कि वह मेरे इन प्रश्नों का जवाब देंगे।

मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने किया था दसवीं और बारहवीं के बच्चों का परीक्षा शुल्क देने की घोषणा - मनीष सिसोदिया

22 जून को त्याग राज स्टेडियम में छात्रों के साथ दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल जी द्वारा किए गए एक संवाद कार्यक्रम का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि उस कार्यक्रम में लगभग 1000 ऐसे छात्र जो कि 90% या उससे अधिक नंबर लेकर 12 कक्षा में उत्तीर्ण हुए थे, उनके साथ मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल जी ने संवाद किया था। उस संवाद कार्यक्रम में सभी छात्रों ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल जी के समक्ष अपनी एक अपील रखी कि हम सभी बेहद गरीब परिवारों से आते हैं, दिल्ली सरकार ने दिल्ली के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों के लिए बेहद ही लाभदायक योजनाएं शुरू की हैं, इन्हीं योजनाओं के साथ-साथ हमारी सीबीएसई बोर्ड की ₹450 की फीस भी माफ कर दी जाए। छात्रों की अपील पर उसी समय अरविंद केजरीवाल जी ने 10वीं और 12वीं के छात्रों की बोर्ड की फीस दिल्ली सरकार द्वारा देने का ऐलान किया था।

भाजपा नेताओं ने बढ़वा दी फीस - मनीष सिसोदिया

मनीष सिसोदिया ने कहा कि इस ऐलान के तुरंत बाद भाजपा में एक बौखलाहट पैदा हो गई और उसका कारण यह था कि पूरे देश में सबसे अधिक सीबीएसई के स्कूल दिल्ली में हैं। दिल्ली के सभी स्कूलों में कुल मिलाकर 44 लाख बच्चे पढ़ते हैं और केवल 10वीं और 12वीं के छात्रों को देखा जाए तो लगभग 5 से 6 लाख बच्चे होते हैं। दिल्ली सरकार की इस योजना से लगभग 3.5 से 4 लाख बच्चों को फायदा होने वाला था। भाजपा को लगा कि इतने बड़े स्तर पर लोगों को लाभ होगा तो भाजपा की राजनीति शून्य हो जाएगी और एक षड्यंत्र के तहत भारतीय जनता पार्टी ने सीबीएसई की फीस बढ़ाने की साजिश रची। भाजपा ने साजिश के तहत एससी एसटी छात्रों की फीस बढ़ाकर 1650 रुपए और जरनल कैटेगरी के छात्रों की फीस बढ़ाकर 1950 रूपय कर दी। जब छात्र अपनी फीस माफ करने की मांग कर रहे थे, तो सीबीएसई की फीस 4 गुना क्यों बढ़ाई गई भाजपा के नेता इस बात का जवाब दें?

भाजपा महंगी शिक्षा की पक्षधर है - मनीष सिसोदिया

मनीष सिसोदिया ने कहा दिल्ली के 6 लाख परिवारों पर अचानक महंगी शिक्षा का बोझ डालना यह दिखाता है कि भाजपा महंगी शिक्षा की पक्षधर है। यह दिखाता है कि भारतीय जनता पार्टी ने दिल्ली के छह लाख बच्चों पर गाज गिराने की साजिश रची है। उन्होंने कहा कि शुक्र है समय रहते दिल्ली सरकार ने काफी तैयारियां कर ली थी, जिसके तहत लाखों बच्चों को इसका लाभ मिला, दिल्ली सरकार उनकी बोर्ड की फीस दे रही है। परंतु मेरा भाजपा के लोगों से यह प्रश्न है कि आप को बच्चों को सस्ती शिक्षा मिलने से आपत्ति क्यों है? भाजपा के नेता बताएं कि आप शिक्षा को देश सेवा का काम मानते हैं या व्यापार मानते हैं?
केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर पर हमलावर होते हुए मनीष सिसोदिया ने उनसे भी प्रश्न किया कि आप भी एक समय शिक्षा मंत्री के पद पर आसीन रह चुके है और वर्तमान में भी केंद्र सरकार में कैबिनेट मंत्री के पद पर आसीन है। आप दिल्ली की जनता को बताएं कि केंद्र ने दिल्ली के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के साथ यह धोखा क्यों किया? दिल्ली के स्कूलों की 10वीं और 12वीं कक्षा में पढ़ने वाले लगभग 6लाख छात्रों पर लगभग 100 करोड रुपए का अतिरिक्त भार डालने की यह साजिश क्यों रची। उन्होंने एक सवाल के जवाब में कहा दिल्ली में पुराना टेप नहीं चलेगा। यहां चुनाव मुद्दे पर होगा और मुद्दा शिक्षा है।

दिल्ली में इस तरह बढ़ता गया सीबीएसई परीक्षा शुल्क...

दिल्ली सरकार के स्कूलों के इतिहास में पहली बार 12वीं कक्षा मेंं 1089 बच्चों ने 90% से अधिक प्राप्त किया तो मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने पिछले साल 22जून को इन छात्रों को उनके माता-पिता के साथ स्वागत किया। उस दिन, छात्र के एक अनुरोध का जवाब देते हुए, मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने घोषणा की थी कि राज्य सरकार अपने सभी दसवीं और बारहवीं कक्षा के छात्रों की पूरी परीक्षा फीस देगी, यह शुल्क सामान्य के लिए 450रु और एससी/एसटी के लिए 125रुपये थे।

हालाँकि, 2अगस्त, 2019 को सीबीएसई ने परीक्षा शुल्क में भारी बढ़ोतरी की घोषणा की, जिसके बाद परीक्षा शुल्क सामान्य के लिए 1950रु और एससी/एसटी के लिए 1650रुपये हो गए। सीबीएसई के फैसले से दिल्ली सरकार की स्कूलों में कक्षा 10 और 12 के लगभग 3.5लाख छात्र प्रभावित हुए और इससे सहायता प्राप्त स्कूलों के अलावा अन्य एजेंसियों के लगभग 4000छात्र शामिल है। जिसमें एनडीएमसी, डीसीएम औरडीएसडब्ल्यू स्कूल शामिल है। दिल्ली में निजी स्कूलों के लगभग 2लाख छात्र और केंद्रीय विद्यालय के 15हजार छात्र है, इन पर भी इसका असर पड़ा।

दिल्ली सरकार ने अपनी सचिव शिक्षा को निर्देश दिया कि वह इस बढ़ोतरी के लिए सीबीएसई के पास विरोध दर्ज कराए जब CBSE ने शुल्क वापस नहीं लिया, तो दिल्ली सरकार ने निर्णय लिया (कैबिनेट बैठक में 18/9/2019 को) कि सभी छात्रों के पूर्ण शुल्क का भुगतान होगा। इसके लिए 30/12/2019 को संशोधित अनुमान को मंजूरी दी गई। अब एनडीएमसी, डीसीबी और डीसीडब्ल्यू के छात्रों सहित सभी छात्रों की फीस देने में 61करोड़ रु खर्च होंगे। हालाँकि, 200000 निजी स्कूल के अभिभावकों पर बढ़े शुल्क का बोझ पड़ेगा। साथ ही दिल्ली के 15,000 केवीएस छात्र पर भी इसका बोझ पड़ेगा। इसके लिए 35 करोड़ का अतिरिक्त बोझ माता-पिता पर पड़ेगा।

 
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