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हर दुर्घटना पीड़ित की जान बचाएंगे-श्री केजरीवाल

October 08, 2019 08:59 PM

नई दिल्ली - दिल्ली में दुर्घटना में घायल लोगों को अस्पताल पहुंचाने वाले अब फरिश्ते कहलाएंगे। मुख्यमंत्री श्री अरविंद केजरीवाल ने सोमवार को MAMC अस्पताल में इस योजना को लांच किया। इस दौरान कई फरिश्ते को मुख्यमंत्री ने सर्टिफिकेट देकर सम्मानित किया। इस दौरान उन तीन लोगों ने अपनी कहानी भी बताई, जिनकी दुर्घटना के तत्काल बाद अस्पताल पहुंचाने से जान बची। फरिश्ता बने कुछ लोगों ने भी अपना अनुभव साझा किया। 

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने इस दौरान कहा कि डेढ़ साल पहले पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर इस योजना को लागू किया गया था। इस दौरान योजना में मिली खामियों को दूर कर इसे आज लांच किया जा रहा है। हम राजनीति में आने से पहले समाजसेवक थें। पहले छोटे स्तर पर काम का अवसर था। आज मुख्यमंत्री बनकर बड़े स्तर पर लोगों के सेवा का अवसर मिला है। उसे ही कर रहे हैं। इसी कारण घायलों के मुफ्त इलाज का निर्णय लिया। इस योजना में अब तक करीब तीन हजार लोगों की जान बची है। काफी लोग मुझसे मिले हैं। उनसे मिलकर अच्छा लगता है कि लोगों के टैक्स के पैसे का इस्तेमाल उनकी सेवा में हो रहा है। पहले लोगों को लगता था कि उनके टैक्स के पैसे की चोरी हो जाती है। लेकिन अब लोगों को संतोष है कि उनके टैक्स  का पैसा उनके काम आ रहा है। 

दुर्घटना में पहला एक घंटा महत्वपूर्ण 

मुख्यमंत्री ने बताया कि दुर्घटना होने के बाद पहला एक घंटा गोल्डन होता है। अगर उस दौरान इलाज मिल गया तो जान बचने की 80 फीसद संभावना होती है। पहले लोग डरते थे कि अस्पताल पहुंचाने पर समस्या न बढ़ जाए। अस्पताल इलाज से इंकार न कर दे। पुलिस न परेशान करे। दिल्ली में बचाई गई तीन हजार जान से साफ है कि अब ऐसा नहीं हो रहा है।

सही समय पर मिलता इलाज तो बच जाती निर्भया की जान

सीएम ने कहा कि निर्भया घटना के बाद घायल सड़क पर पड़ी रही। अगर उसे समय से इलाज मिला होता तो जान बच जाती। ऐसे तमाम लोग हैं जिनकी समय पर इलाज न मिलने के कारण मौत हो गई। अब दिल्ली में ऐसा न हो। ज्यादा से ज्यादी लोग फरिश्ते बने। घायल के इलाज का सारा खर्च दिल्ली सरकार उठाएगी। चाहें खर्च कितना भी आए। सीएम ने आटो और टैक्सी चालकों से अपील किए कि वह काफी समय सड़क पर रहते हैं, कोई भी घायल दिखे तो उसे जरूर अस्पताल पहुंचाए और फरिश्ते बने।

‘फरिश्ते दिल्ली के’ योजना को मुख्यमंत्री ने किया लांच, फरिश्ते हुए सम्मानित 

रोड एक्सीडेंट पीड़ित को अस्पताल पहुंचाने वाले फ़रिश्ते कहलाएंगे-श्री अरविंद केजरीवाल 

 

 दिल्ली के सभी लोगों को स्कीम की जानकारी हो - स्वास्थ्य मंत्री 

स्वास्थ्य मंत्री श्री सतेंद्र जैन ने कहा कि हमारे मुख्यमंत्री श्री अरविंद केजरीवाल जी का पसंदीदा गाना ही है इंसान का इंसान से हो भाईचारा। इस तरह का गाना पसंद करने वाला व्यक्ति ही घायलों के इलाज की मुफ्त स्कीम ला सकता है। मुझे अफसोस है कि अब भी 80 फीसद लोगों को इस स्कीम की जानकारी नहीं है। जबकि दिल्ली के हर व्यक्ति को इसके बारे में पता होना चाहिए। हमारे लिए हर जान किमती है। दिल्ली के फरिश्ते की कहानी सभी को बताया जाना चाहिए। जिससे ज्यादा से ज्यादा लोग घायलों की मदद को सामने आए। सुप्रीम कोर्ट ने जब घायलों के इलाज से इन्कार पर रोक लगाई तो सबसे बड़ी समस्या यह खड़ी हुई कि अस्पताल को पैसा कौन दे। अरविंद केजरीवाल सरकार ने यह जिम्मा अपने कंधे पर लिया। 

घायल को दिल्ली के किसी अस्पताल में ले जाए, सारा खर्च सरकार उठाएगी। अगर घायल को पहले छोटे अस्पताल में भर्ती करा दिया गया है और उसे बड़े अस्पताल ले जाना है तो एंबुलेंस का खर्च भी सरकार देगी। साथ ही अस्पताल ले जाने वाले को दो हजार रुपये दिया जाएगा। हालांकि अभी तक का अनुभव है कि लोग पैसे लेने से मना कर देते हैं। अस्पताल किसी को भर्ती करने से मना करता है तो उसका लाइसेंस निरस्त कर दिया जाएगा। प्रारंभ में दिक्कत आ रही थी, अस्पताल संचालकों के साथ बैठक की गई. जिसके बाद यह समस्या खत्म हो गई। 

हैशटैग फरिश्ते दिल्ली के से सीएम ने किया ट्वीट 

स्कीम लांच के बाद मुख्यमंत्री श्री अरविंद केजरीवाल ने  फरिश्ते दिल्ली के हैशटैग से ट्वीट किए। जिसमें उन्होंने लिखा कि 'फरिश्ते दिल्ली के' स्कीम हर नागरिक के लिए गारंटी है कि अगर आप रोड एक्सीडेंट पीड़ित को तुरंत अस्पताल ले जाते हैं तो आप को किसी भी पुलिस प्रक्रिया में शामिल होने की जरूरत नहीं है।  उस पीड़ित के इलाज का पूरा खर्च दिल्ली सरकार उठाएगी, चाहे इलाज और अस्पताल जितना भी महंगा हो। दिल्ली के हर नागरिक की जान हमारे लिए कीमती है। दिल्ली में हुए किसी भी रोड एक्सीडेंट पीड़ित की जान पैसे के अभाव से हम नहीं जाने देंगे और जो पीड़ित को अस्पताल तक पहुंचाएगा वो दिल्ली का फरिश्ता कहलाएगा। 

मेरे भाई शिवम की सड़क दुर्घटना में मौत हो गई। उसे एक कार ने टक्कर मारी और भाग गया। शिवम जब घायल हुआ था तब वहां तीन सौ लोग पहुंचे लेकिन किसी ने मेरे भाई को अस्पताल नहीं पहुंचाया। मैंने 2012 में सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई। 2016 में कोर्ट का निर्णय आया। कोर्ट ने कहा किसी भी घायल के इलाज से निजी अस्पताल इंकार नहीं कर सकता। साथ ही अस्पताल पहुंचाने वाले से कोई पूछताछ नहीं होगी। इस पर सिर्फ दिल्ली सरकार ने काम किया और घायलों के मुफ्त इलाज की योजना बनाई। अगर मेरे भाई की दुर्घटना अब हुई होती तो उसकी जान बच जाती। मैं इस योजना के लिए मुख्यमंत्री को बधाई देने आया हूं। 

- पीयूष तिवारी, सेव लाईफ फाउंडेशन के संस्थापक 

लोगों की जुबानी 

इमैनुअल जेमस, मंगोलपुरी  - मेरी 3 साल की बेटी एना घायल हो गई थी। मेरी पत्नी का फोन आया। मैं अस्पताल पहुंचा। बेटी को स्ट्रेचर पर लेटा रखा था। कई सारे चोट थें। पहले तो लगा वह है ही नहीं। फिर डाक्टरों ने इलाज शुरू किया। मेरी बेटी 15 दिन अस्पताल में रही। मुझे जरा भी एहसास नहीं हुआ। बेटी के इलाज का सारा खर्च दिल्ली सरकार ने उठाया। अगर दिल्ली सरकार की यह स्कीम न होती तो आज मेरी बेटी न बचती। आज भी वह दिन याद आता है तो आंख में आंसू आ जाता है।

रोहित बंसल, पटेल नगर - मेरे पापा हर दिन की तरह कबूतर को दाना डालने गए थें। तभी फोन आया कि उनका एक्सीडेंट हो गया है। मैं तत्काल निजी पहुंचा। पहले दस हजार रुपये जमा करा दिए। फिर एक रिश्तेदार ने दिल्ली सरकार की स्कीम के बारे में बताया। पापा 12 दिन अस्पताल में रहे। उनके इलाज का सारा खर्च दिल्ली सरकार ने उठाया। हमें जरा भी एहसास नहीं होने दिया गया। मैं अरविंद केजरीवाल जी को धन्यवाद देना चाहता हूं।  

कृष्ण कुमार, नजफगढ़ -  मैं दुकान बढ़ाकर खाना खाने जा रहा था। तभी दो कारों के बीच में आ गया। हाथ - पैर की कई हड्डी टूट गई। दोस्तों ने पास के निजी अस्पताल में भर्ती कराया। सिर में  26 टांके आए थें। कई जगह से हड्डी टूट गई थी। इलाज पर डाक्टरों ने मोटा खर्च बताया। मैं 300-400 रुपये कमाए कमाने वाला हूं। इतना पैसे कहां से लाता। तभी दोस्तों ने दिल्ली सरकार के स्कीम के बारे में बताया। जिसके बाद मेरा इस स्कीम के तहत इलाज हुआ। आज जिंदा हूं तो दिल्ली  सरकार के स्कीम की वजह से।

फरिश्ते स्कीम 

यह स्कीम दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की तरफ से सड़क दुर्घटना में घायल लोगों को नया जीवन देने के लिए शुरू की गई है। जिसके तहत सड़क दुर्घटना में घायल लोगों को किसी नजदीकी अस्पताल ले जाने वाले लोगों से अब कोई पूछताछ नहीं होगी। साथ ही ऐसा करने वाले को दिल्ली सरकार की तरफ से पुरस्कार दिया जाएगा। जिसमें दो हजार रुपये नकद और मुख्यमंत्री की तरफ से फरिश्ते सर्टिफिकेट दिया जाएगा। साथ ही दुर्घटना में घायल का सारा खर्च दिल्ली सरकार उठाएगी। दुर्घटना में घायल व्यक्ति चाहे कोई भी हो। 

राजधानी में हर साल होती है करीब आठ हजार सड़क दुर्घटनाएं 

राजधानी में हर साल लगभग 8000 ऐसी दुर्घटनाएं होती हैं। कई बार सड़क पर दुर्घटनाओं की स्थिति में लोग सरकारी अस्पताल की ओर जाने की कोशिश करते हैं और इसी लेटलतीफी के कारण कई बार दुर्घटनाओं से मौत भी हो जाती है। राजधानी में सड़क दुर्घटनाओं, आगजनी और एसिड अटैक के बाद अक्सर पीड़ितों को समय पर सही इलाज नहीं मिल पाता। कई बार सड़क पर दुर्घटना में घायल लोगों की अनदेखी की तस्वीरें भी सामने आ चुकी है। 

दिल्ली सरकार ने फरवरी 2018 में शुरू की थी योजना 

दिल्ली में अरविंद केजरीवाल सरकार ने दिल्ली की सीमा में दुर्घटना होने पर मुफ्त इलाज की योजना बनाई थी। जिसके तहत पीड़ित को दुर्घटना के 72 घंटे के अंदर किसी भी निजी या सरकारी अस्पताल में फ्री कैशलेस इलाज की व्यवस्था की गई थी। साथ ही जो भी व्यक्ति दुर्घटना के शिकार  को अस्पताल ले जाएगा उसको 2 हजार रुपये का पुरस्कार मिलेगा। घायलों के इलाज के लिए सभी निजी अस्पताल शामिल है। दिल्ली सरकार ने व्यवस्था की है कि कोई अस्पताल अगर पीड़ित का इलाज करने से मना करेगा तो दिल्ली सरकार उस अस्पताल का लाइसेंस निरस्त करने से भी नहीं हिचकेगी। इस योजना के तहत पूरा खर्च दिल्ली सरकार का स्वास्थ्य मंत्रालय वहन कर रही है। यही नहीं, घायल को अस्पताल ले जाने का खर्च भी सरकार देती है। 10 किलोमीटर के दायरे में एक हजार रुपये और उसके बाद प्रति किलोमीटर 100 रुपये मिलते हैं। यही नहीं, दुर्घटना के 72 घंटे के अंदर अस्पताल में कोई भर्ती हुआ है और इलाज चल रहा है तो वह भी इस स्कीम में फायदा ले सकता है। इस स्कीम के तहत इलाज के लिए अस्पताल कोई दस्तावेज नहीं मांग सकता। अस्पताल को इस स्कीम के तहत किसी तरह के एग्रीमेंट की आवश्यकता नहीं है। 

अब तक तीन हजार लोगों की जान बचाई गई

दिल्ली सरकार की स्कीम के तहत फरवरी 2018 से अब तक दिल्ली में तीन हजार लोगों की जान इस स्कीम के तहत बचाई गई है। इन सब लोगों के इलाज का सारा खर्च दिल्ली सरकार ने उठाया। इस योजना के तहत अस्पताल पहुंचाने वाले सैकड़ों लोगों को दिल्ली सरकार पुरस्कार दे चुकी है। 

 

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