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कैप्टन के सलाहकार विधायकों को अयोग्य ठहराने के लिए राज्यपाल को मिला 'आप' का वफद

September 26, 2019 01:24 PM

 पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह की ओर से 6 विधायकों को सलाहकार लगाने के विरोध में आम आदमी पार्टी (आप) का वफद हरपाल सिंह चीमा की अध्यक्षता में बुधवार को पंजाब के राज्यपाल वी.पी सिंह बदनौर को मिला व विधायक होने के साथ-साथ कैबिनेट मंत्री के रुतबे वाला लाभ का पद (आफिस ऑफ प्रोफीट) लेने के कारण इन 6 विधायकों को अयोग्य ठहराए जाने की मांग की। इसके साथ ही वफद ने किसान नेता मनजीत सिंह धनेर की सजा माफी की भी मांग की। 
    वफद में प्रतिपक्ष के नेता हरपाल सिंह चीमा, विधायक कुलतार सिंह संधवां, प्रिंसीपल बुद्ध राम, बीबी सर्वजीत कौर माणूंके, अमन अरोड़ा, जै कृष्ण सिंह रोड़ी, कुलवंत सिंह पंडोरी, मनजीत सिंह बिलासपुर, मीत हेयर (सभी विधायक), कुलदीप सिंह धालीवाल, बलजिंदर सिंह चौंदा, दलबीर सिंह ढिल्लों, हरचंद सिंह बरस्ट, मनजीत सिंह सिद्धू (सभी कोर कमेटी के सदस्य), मास्टर प्रेम कुमार व गुरविंदर सिंह उपस्थित थे।

किसान नेता मनजीत सिंह धनेर की सजा माफी की उठाई मांग

 

 
    प्रतिपक्ष के नेता हरपाल सिंह चीमा की अध्यक्षता में आम आदमी पार्टी (आप) पंजाब का वफद दो अहम मुद्दों को पंजाब के राज्यपाल वी.पी सिंह बदनौर के ध्यान में लाया गया। जिसमें पहला मुद्दा मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह की ओर से 6 कांग्रेसी विधायकों (कुशलदीप सिंह किक्की ढिल्लों, अमरिंदर सिंह राजा वडि़ंग, इंद्रबीर सिंह बुलारीया, कुलजीत सिंह नागरा, संगत सिंह गिलजीयां व तरसेम सिंह डीसी) को कैबिनेट मंत्री के रुतबे से सलाहकार नियुक्त कर लाभ के पद (आफिस ऑफ प्रोफीट) पर बैठाने के बारे में है, जो संविधान की सरासर उल्लंघना व पहले ही वित्तीय संकट से गुजर रहे राज्य के खजाने पर फालतू बोझ है। 
    हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि मुख्यमंत्री पंजाब ने अपनी हिल रही कुर्सी को बचाने व नाराज विधायकों को लालच देने के लिए किए गए इस संवैधानिक उल्लंघन को कानूनी तौर पर जायज ठहराने के लिए गैर-कानूनी तरीके से आर्डिनेंस/बिल लाया जा रहा है, जिस को पंजाब के राज्यपाल वी.पी सिंह बदनौर की ओर से से प्रवानगी मिलते ही अंतिम रूप दे दिया जाएगा और इस को पिछली तिथि से लागू करवाया जाएगा। वफद ने राज्यपाल को गुजारिश की है कि कैप्टन अमरिन्दर सिंह सरकार की ओर से की गई इस संवैधानिक कोताही को कोई समर्थन न दिया जाए, क्योंकि एक तरफ ईटीटी, टैट पास और अन्य उच्च शैक्षिक योग्यताएं रखने वाले योग्य परंतु बेरोजगार नौजवान लडक़े-लड़कियां रोजगार के लिए सडक़ों से लेकर पानी वाली टैंकियों पर चढ़ जान जोखिम में डाल रहे हैं। जबकि हजारों स्कूल में एक- एक अध्यापक है और दर्जनों स्कूल ऐसे हैं जिनमें एक भी अध्यापक नहीं है। बेरोजगारी के कारण नौजवान पीढ़ी नशे के जाल में फंस रही है। किसान और खेत मजदूर कर्ज के कारण आत्महत्याएं करने के लिए मजबूर हैं। बुजुर्ग, विधवाएं और अपंग 2500 रुपए पैंशन को और स्कूलों में मिड-डे-मील और आंगणवाड़ी केन्द्रों में लाखों बच्चे दलीए को तरस रहे हैं। व्यापारियों-कारोबारियों समेत हर वर्ग कंगाली के कगार पर आ खड़ा हुआ है, क्योंकि वित्तीय संकट का हवाला दे कर कैप्टन सरकार अपनी बुनियादी जिम्मेवारियों से भागी है, दूसरी तरफ़ बड़ी संख्या में सलाहकारों की फौज तैनात कर सरकारी खजाने पर करोड़ों रुपए का फालतू बोझ डाला जा रहा है। 
    इस लिए पंजाब सरकार के 9 सितम्बर 2019 के सलाहकार लगाने के फैसले को रद्द किया जाए, जो भारत के संविधान के आर्टीकल 164 ( ए) की सीधी उल्लंघन है, क्योंकि इस कानून के अनुसार कोई भी मुख्यमंत्री अपने राज्य के कुल विधायकों की संख्या के 15 प्रतिश्त से अधिक कैबिनेट रैंक नहीं दे सकता। यहां स्पष्ट किया जाता है माननीय सुप्रीम और विभिन्न हाई कोर्ट की ओर से जस प्रदेश ने भी इस तरह की उल्लंघना की है, उसे रद्द किया गया है। 
    इस लिए न केवल इन 'सलाहकारों' की नियुक्ति रद्द कर विधायक होते हुए लाभ का पद लेने के लिए इन 6 विधायकों को अयोग्य ठहराया जाए, बल्कि भारतीय संविधान की धारा 356 के अंतर्गत पूरी पंजाब सरकार को बर्खास्त करने के लिए देश के राष्ट्रपति को सिफारिश की जाए। 
    चीमा ने बताया कि आम आदमी पार्टी ने राज्यपाल पंजाब से किसान नेता मनजीत सिंह धनेर की सजा माफी के लिए भी मांग की है, क्योंकि यह मसला बरनाला जिले समेत पंजाब के लाखों लोगों की भावनाओं के साथ संबंध रखता है। जिसको लेकर किरनजीत कत्ल कांड एक्शन समिति महल कलां, विभिन्न जत्थेबंदियां और किसान संगठनों पर आधारित राज्य स्तरीय संघर्ष समिति संघर्ष के रास्ते पर हैं। यह मामला पहले ही पंजाब राज्यपाल के ध्यान हित है। इस लिए इस मसले को गंभीरता के साथ विचारा जाए और मनजीत सिंह धनेर की सजा माफ की जाए। 
    चीमा ने यह भी बताया कि राज्यपाल पंजाब ने जहां मनजीत सिंह धनेर के मामले पर भरोसा दिया कि जब भी सरकार की तरफ से उनके पास इस सम्बन्धित प्रस्ताव आता है तो वह इसको गंभीरता के साथ देखेंगे। इसी तरह का भरोसा सलाहकारों के मामले पर भी दिया गया। 

 

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