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शीला दीक्षित का शासन होता तो बिजली में ही लुट जाती 'दिल्ली'

June 11, 2019 02:45 PM

शीला के अनर्गल आरोप और आप का साक्ष्यों के साथ जवाब

अपने खोए अस्तित्व को पुनर्जिवित करने के लिए आम आदमी पार्टी पर अनर्गल आरोप लगा रही कांग्रेस पार्टी के बयान दिल्ली की जनता के गले नहीं उतर पा रहे हैं। देश में सबसे सस्ती बिजली देने वाले दिल्ली के मुख्यमंत्री के खिलाफ भला जनता उस कांग्रेस की गलत बयानी पर यकीं करे भी तो कैसे करे, जिस कांग्रेस ने अपने शासन काल में बिजली कंपनियों की मिली भगत से जनता को त्रहीमाम करवाया था।

कांग्रेस शासन काल में जब शीला दीक्षित से बिजली के दाम कम करने को कहा जाता था तो बिजली कंपनियों के घाटे का रोना खुद शीला दीक्षित रोने लगती थी। शीला दीक्षित तब कहती थी कि बिजली के दाम किसी भी सूरत में घटाना मुमकिन ही नहीं है। 

आम आदमी पार्टी के हाथों में दिल्ली की बागडोर आते ही 2015 में 1 किलोवॉट लोड 50 यूनिट का बिल 272 से घट कर 170, 150 यूनिट का बिल 726 से घट कर 424, 200 यूनिट  का 953 से घटकर 550 हो गया. इसी क्रम में 400 यूनिट का 2372 का बिल 1370 का हो गया।

पानी और बिजली की आसमान छूती दरों का यह वह दौर था जब आम आदमी का दिल्ली में बिजली पानी की अनियंत्रित होती कीमतों से जीना दूभर हो रहा था। आम आदमी पार्टी ने तब मुख्यतय: बिजली और पानी को ही अपना प्रमुख चुनावी मुद्दा बना कर कांग्रेस को शून्य सीट पर ला दिया किंतु आज कांग्रेस नेत्री एवं दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित जब बिजली की दरों पर केजरीवाल सरकार को घेरने का असफल प्रयास करती हैं तो जनता के बीच कांग्रेस की वरिष्ठ नेत्री के बयान खुद ब खुद हास्यास्पद बन जाते हैं।

आइए जानते हैं कि शीला राज में बिजली के दाम क्या थे, और आज बिजली की दरें क्या हैं ?
बिजली के दाम शीला राज में छूते थे आसमान : दिल्ली में रहने वाले उस व्यक्ति को जिसका 1 किलो वॉट स्वीकृत लोड था और जो परिवार मात्र 50 यूनिट बिजली वर्ष 2010 में खर्च करता था उसे इसके लिए 103 रू. चुकाने पड़ते थे। जबकि 5 किलोवॉट स्वीकृत लोड व 400 यूनिट की बिजली खपत के लिए 2010 में 1404 रू. का बिजली बिल अदा करना होता था। यह दरें हर साल बढ़ाई जाती थी इसीलिए तीन सालों के भीतर यह दरें दोगुनी से अधिक हो गयी। वर्ष 2013 में 1 किलोवॉट के स्वीकृत लोड व 50 यूनिट की खपत पर बिजली का बिल 103 से बढ़ कर 272 हो गया जबकि 5 किलोवॉट स्वीकृत लोड व 400 यूनिट खपत पर 1404 वाला बिल 2013 में बढ़ कर 2372 हो गया।
शीला राज में कुछ इस तरह बेकाबू हुए बिजली के दाम :

बिजली की यह दरें इतनी तेजी से बढ़ रही थी कि 100 यूनिट बिजली की दरें 2010 में 181 रूपये थी तेा 2013 में 499 रूपये हो गई। 150 यूनिट 260 से बढ़ कर 726 हो गई।  2 किलोवॉट लोड में 200 यूनिट जिसका बिल 2010 में 539 रूपये आता था 2013 में यही बिल बढ कर 953 का हो गया। इसी क्रम में 4 किलोवॉट लोड पर 400 यूनिट की खपत का 2010 में आने वाला 1404 का बिल भी 5 किलोवॉट लोड के बराबर ही 2013 में 2372 का हो गया। शीला दीक्षित के राज में बिलों में हुई बेतहाशा बढ़ोत्तरी को आप दी गई तालिका से बेहतर समझ सकते हैं। मगर इसके ठीक विपरीत आम आदमी पार्टी सरकार के सत्ता में आते ही बिजली के दाम आधे कर दिए गए।

पहले हर साल बढ़ने वाले दाम अब घटने लगे :

आम आदमी पार्टी के हाथों में दिल्ली की बागडोर आते ही 2015 में 1 किलोवॉट लोड 50 यूनिट का बिल 272 से घट कर 170, 150 यूनिट का बिल 726 से घट कर 424, 200 यूनिट  का 953 से घटकर 550 हो गया. इसी क्रम में 400 यूनिट का 2372 का बिल 1370 का हो गया।

2017 में अरविंद केजरीवाल ने फिर घटाई दरें :

आज तक जनता ने हर साल बिजली के बढ़ते दाम देखे थे किंतु अब जनता ईमानदार सरकार के कार्यकाल में बिजली के दामों में आ रही कमी की गवाह बन रही थी। अब तक 50 यूनिट पर आने वाला 170 का बिल 157 का हो गया। 100 यूनिट पर भी 297 की बजाय अब 291 का बिल आने लगा। यानि आम आदमी पार्टी की सरकार दिल्ली के आम नागरिकों को अधिक से अधिक राहत देने की दिशा में लगातार काम कर रही है।

आज की ताजा स्थिति :

आम आदमी पार्टी सरकार में आज भी बिजली की दरें देश में सबसे कम हैं और जल्द यह दरें और भी कम होने वाली हैं। वर्ष 2019 में दिल्ली में हम 50 यूनिट के लिए 128 रूपये का बिल अदा कर रहे हैं जबकि 100 यूनिट के लिए यहां 211 रू. का बिल भरना होता है। इसी प्रकार आज भी 400 यूनिट के लिए दिल्ली वासी मात्र 1680 रू. का भुगतान करते हैं।

शीला दीक्षित होती तो क्या होता ?

दिल्ली में पूर्व की कांग्रेस सरकार जिस तरह से दिल्ली वासियों को बिजली कंपनियों को फायदा पहुंचाते हुए लूट रही थी यदि पिछले पांच सालों में भी दिल्ली आम आदमी पार्टी की जगह कांग्रेस को चुनने की भूल कर बैठती तो आज दिल्ली वासी 50 यूनिट के लिए 1167 रूपये का बिल भर रहे होते, जबकि 100 यूनिट के लिए बिजली कंपनियां शीला दीक्षित की अनुमति से 2248 का बिल वसूल रही होती और आपका 400 यूनिट बिजली का बिल 5643 रूपये का होता।

मात्र सस्ती बिजली से इतना पैसा बचाते हैं दिल्ली वासी :

यहां 50 यूनिट खर्च करने वालों को 12,456 रूपये प्रति वर्ष, 100 यूनिट खर्च करने वालों को 24,444 प्रतिवर्ष,150 यूनिट खर्च करने वालों को 35,268 रूपये प्रतिवर्ष बचत हो रही है। इसी प्रकार 4 किलोवॉट लोड और 400 यूनिट खपत करने वाला व्यक्ति भी दिल्ली में 47556 रूपये प्रति वर्ष बचा रहा है।

शीला शासन की तुलना में 91 फीसद तक बिजली में बचा रही है दिल्ली :

यहां आम आदमी पार्टी द्वारा बिजली कंपनियों की नकेल कसने से दिल्ली वाले 50 यूनिट पर 89 फीसदी, 100 यूनिट पर 91 फीसदी, 150 यूनिट पर 88 फीसदी, 200 यूनिट पर 74 फीसदी, 300 यूनिट पर 75 फीसदी, 400 यूनिट पर 76 फीसदी तक पैसा बचा रहे हैं. कुल मिला कर कांग्रेस की थोथी बयानबाजी आम आदमी पार्टी सरकार के तथ्यों के सामने टिकना कांग्रेस का दिवास्वप्न देखने जैसा है।

 

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