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'शाही फौजी' ने असली फौजियों के लिए कुछ नहीं किया -हरपाल सिंह चीमा

April 27, 2019 05:02 PM

चंडीगढ़, विरोधी पक्ष के नेता हरपाल सिंह चीमा ने मुख्य मंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह पर हमला बोलते कहा कि शाही परिवार के 'शाही फौजी' ने असली फौजियों के लिए कुछ भी नहीं किया, जबकि यह असली फौज लंबे समय से 'वन रैंक वन पैंशन' (ओआरओपी) समेत अपनी अन्य जायज मांगों के बारे में केंद्र और राज्य सरकार से संघर्ष करते आ रहे हैं, परंतु कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने इन असली फौजियों-पूर्व फौजियों की कभी भी प्रवाह नहीं की।

    गुरदासपुर में कैप्टन की ओर से शुरू की गई 'फिल्मी फौजी' बनाम 'असली फौजी' की चर्चा पर बयान जारी करते हुए हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि अकाली-भाजपा की तरफ से गुरदासपुर में पैराशूट के द्वारा उतारे गए फिल्म स्टार सनी दियोल 'फिल्मी फौजी' हैं, इस में कोई शक नहीं। एक फिल्मी से अकाली-भाजपा गठबंधन वाली मोदी सरकार ने फौजियों पर राजनीति करने के इलावा इन 5 सालों में कुछ भी नहीं किया। फौजी सैनिक वीरों को समर्पित गुरदासपुर-पठानकोट की सरजमीं के लिए कुछ कर दिखाने की कोई उम्मीद नहीं की जानी चाहिए।

विरोधी पक्ष के नेता हरपाल सिंह चीमा ने मुख्य मंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह पर हमला बोलते कहा कि शाही परिवार के 'शाही फौजी' ने असली फौजियों के लिए कुछ भी नहीं किया, जबकि यह असली फौज लंबे समय से 'वन रैंक वन पैंशन' (ओआरओपी) समेत अपनी अन्य जायज मांगों के बारे में केंद्र और राज्य सरकार से संघर्ष करते आ रहे हैं

यह बात समूचे पंजाबियों के साथ-साथ गुरदासपुरीए-पठानकोटीए अच्छी तरह से समझते हैं और उन्होंने सनी दियोल को बेरंग मोडऩे का मन बना लिया है। चीमा ने कहा कि मीयां-मिट्ठू बन कर खुद को 'असली फौजी' बताने वाले कैप्टन अमरिन्दर सिंह वास्तव में 'शाही फौजी' हैं, जो महलों-पहाड़ों पर रहते हैं और हवा में उड़ते हैं। इस शाही फौजी का असली फौजियों के साथ वोट लेने के इलावा कोई सरोकार नहीं।

    हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि यदि कैप्टन अमरिन्दर सिंह असली के फौजी होते तो वह फौजियों और पूर्व फौजियों की ओ.आर.ओ.पी समेत सभी मांगों के लिए केंद्र सरकार के साथ लकीर खींच कर लड़ाई लड़ते और दबाव बनाते। चीमा ने कहा कि ओ.आर.ओ.पी की मांग मोदी सरकार दौरान ही पहली बार नहीं उठी यह मांग पिछली यूपीए सरकार के समय भी थी, परंतु कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने 'असली फौजी' के तौर पर ओ.आर.पी.यो का मुद्दा नहीं उठाया।
    कैप्टन असली फौजी होते तो सरकार की तरफ से फौजियों और पूर्व फौजियों को टोल प्लाजा से छूट देने का ऐलान करते। सेवा मुक्ति के उपरांत सम्मानजनक नौकरियां देते न कि पैसको हाथों पूर्व फौजियों का वित्तीय शोषण करवाते।
    चीमा ने कहा कि कैप्टन अमरिन्दर सिंह जैसे 'फर्जी फौजी' की अपेक्षा तो दिल्ली के मुख्य मंत्री अरविन्द केजरीवाल फौजियों का ज़्यादा सम्मान करते हैं। देश के लिए कुर्बान होने पर शहीद के परिवार को एक करोड़ रुपए तुरंत देते हैं। सरकारी स्कूलों और अस्पतालों की काया-कल्प कर फौजियों समेत हर वर्ग के बच्चों को शानदार पढ़ाई और इलाज की सुविधा देते हैं।
  

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