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महंगे बिजली बिलों को लेकर 'आप' ने कैप्टन सरकार के खिलाफ खोला मोर्चा

February 08, 2019 07:37 PM

चंडीगढ़/संगरूर, बेहद महंगे बिजली बिलों से बेहाल पंजाब के लोगों के हक में डटी आम आदमी पार्टी (आप) ने आज संगरूर जिले से 'बिजली आंदोलन' शुरू कर दिया है। पार्टी के प्रधान और संसद मैंबर भगवंत मान के नेतृत्व में संगरूर विधान सभा हलके के गांव घराचों और सुनाम के गांव शेरों में 'बिजली आंदोलन' के अधीन सैंकड़ों की संख्या में लोग हद से ज्यादा महंगे 60-60 हजार रुपए तक के बिजली के बिल लेकर पहुंचे।

    इस मौके भगवंत मान ने दर्जनों लोगों को मीडिया के समक्ष पेश किया जो एक-एक, दो-दो बल्ब पंखों के हजारों रुपए के बिल हाथों में लेकर पहुंचे हुए थे। घराचों गांव में बिजली कमेटी गठित करते हुए भगवंत मान ने बताया कि आम आदमी पार्टी पंजाब के सभी गांवों में बिजली कमेटियों का गठन करेगी, जो लोगों के नाजायज महंगे और गलत बिल को सही करवाने के लिए बिजली आधिकारियों के साथ बात करेगी और जरूरत पडऩे पर संघर्ष से गुरेज भी नहीं करेगी।
    इस मौके पहुंचे विरोधी पक्ष के नेता हरपाल सिंह चीमा, उप नेता और जगरावां से विधायक सरबजीत कौर माणूंके, श्री अनन्दपुर साहिब से लोक सभा उम्मीदवार नरिन्दर सिंह शेरगिल की मौजुदगी में भगवंत मान ने बताया कि जहां चीमा के नेतृत्व में बिजली के महंगे बिलों का मुद्दा विधान सभा में उठाया जाएगा वहीं वह खुद पार्लियामेंट में उठाएंगे।
    बिजली के बिलों के सताए हुए लोगों ने हाथ खड़े कर कर बिजली बिलों के खिलाफ आर पार की लड़ाई लडऩे का संकल्प लिया। भगवंत मान ने कहा कि बिजली की महंगाई की आग अमीरों और गरीबों समेत किसी को नहीं बख्श रही। इस लिए यदि अब एकजुट हो कर इस आंदोलन का हिस्सा बनोगे तो आम आदमी पार्टी पंजाब के लोगों को बिजली की महंगाई की मार से निजात दिला कर रहेगी।
    भगवंत मान ने महंगी बिजली के लिए प्राईवेट बिजली कंपनियों (थर्मल प्लांटों) को जिम्मेदार ठहराते हुए बताया कि पिछली बादल सरकार मौके सुखबीर सिंह बादल एंड कंपनी ने प्राईवेट कंपनियों के साथ महंगे मूल्यों पर लंबे समय के लिए समझौते किए थे और उस में अपनी मोटी हिस्सेदारी रखी। सरकारी थर्मल प्लाटों को बंद कर प्राईवेट थर्मल प्लांटों के साथ इतने घातक समझौते किए गए कि पंजाब सरकार बेशक बिजली खरीदे या न खरीदे उनको निर्धारित राशि जाती रहेगी।
    इस मौके बोलते मान ने कहा कि दिल्ली में बिजली के मूल्य पूरे देश की अपेक्षा सस्ती हैं। दिल्ली में 200 यूनिट तक बिजली खप्त करने पर 1 रुपए प्रति यूनिट का खर्चा आता है, इसी तरह 200 यूनिट से 400 यूनिट तक प्रति यूनिट 2.50 रुपए वसूले जाते हैं। जबकि पंजाब में 100 यूनिट तक बिजली खप्त करने पर 6 रुपए प्रति यूनिट और 300 यूनिट खप्त करने पर 8.50 रुपए प्रति यूनिट वसूले जाते हैं। मान ने कहा कि महत्वपूर्ण बात यह है कि दिल्ली अपने राज्य में बिजली का उत्पादन नहीं करती और अन्य राज्यों से बिजली खरीद कर दिल्ली के लोगों को सस्ती बिजली मुहैया करवा रही है जबकि पंजाब में बिजली पैदा करने के अनेकों स्रोत हैं और पंजाब बिजली सरपलस्स राज्य होने की बात भी करता है।
    भगवंत मान ने कहा कि यदि कैप्टन अमरिन्दर सिंह सचमुच पंजाब के लोगों की हितैषी होते तो वह बादलों के प्राईवेट कंपनियों के साथ किे घपलेबाजी समझौतों की जांच करवाई जाती। राज्य के लोगों की लूट रोकने के लिए समझौते रद्द किए जाते, प्रस्ताव विधान सभा में लाकर बादलों समेत सब लुटेरों पर कार्यवाही की जाती तो आम आदमी पार्टी भी कैप्टन सरकार का स्वागत करती, क्योंकि यह लोग हित का फैसला होता। परंतु कैप्टन ने बादलों की तरह अपनी हिस्सेदारी फिक्स कर ली और लोगों को बिजली के बिलों के माध्यम से लूटने के लिए छोड़ दिया। भगवंत मान ने बादलों की तरफ से बंद किए बठिंडा थर्मल प्लांट को न शुरू करने के लिए वित्त मंत्री मनप्रीत सिंह बादल को जी भर कर कोसा। 

भगवंत मान ने कहा कि यदि कैप्टन अमरिन्दर सिंह सचमुच पंजाब के लोगों की हितैषी होते तो वह बादलों के प्राईवेट कंपनियों के साथ किे घपलेबाजी समझौतों की जांच करवाई जाती। राज्य के लोगों की लूट रोकने के लिए समझौते रद्द किए जाते, प्रस्ताव विधान सभा में लाकर बादलों समेत सब लुटेरों पर कार्यवाही की जाती तो आम आदमी पार्टी भी कैप्टन सरकार का स्वागत करती

 इस मौके हरपाल सिंह चीमा, बीबी सरबजीत कौर माणूंके, नरिन्दर सिंह शेरगिल, दलबीर सिंह ढिल्लों, राजवंत सिंह घुल्ली, नरिन्दर कौर भराज, भुपिन्दर कौर फिरोजपुर, सुखराज सिंह गौरा फिरोजशाह, राजवीर सिंह घराचों, गुरविन्दर सिंह घराचों, गुरदीप सिंह फग्गूवाला, इन्दरपाल सिंह ने भी संबोधन किया।
भोला सिंह और दलेल सिंह - घराचों गांव के रोजाना वेतन लेने वाले भोला सिंह ने बताया कि उसके तीन कमरों के घर में 4 बल्ब और तीन पंखे हैं। दलित होने के कारण बिजली के बिल माफ थे। 8 दिसंबर 2018 का 16,218 रुपए का बिल दिखाते हुए भोला सिंह ने बताया कि उनको कुछ समझ नहीं आ रही कि इतना बिल क्यूं आ रहा है। बिजली विभाग वाले कोई सुनवाई नहीं कर रहे। बिजली काटने की धमकी से डरते किश्तों पर बिल भरने लगे हैं। अभी भी 2 हजार रुपए बकाया हैं।
    इसी गांव के दलेल सिंह ने 11 दिसंबर 2018 को 2 महीने का जारी हुआ 4,430 रुपए का बिल दिखाते कहा कि जनरल वर्ग से सम्बन्धित बिना जमीन वाला परिवार है। दिहाड़ी की मदद से रोटी चलती है। 5 बल्ब और तीन पंखे हैं। बहुत मुश्किल के साथ इतने महंगे बिजली के बिल भर रहे हैं, नहीं भरते तो बिजली कट जाएगी।
एक बल्ब एक पंखे का बिल 59,532 रुपए -अमर सिंह  (फोटो फाइल नंबर - न्यूज फ़ोटो -2)
अमर सिंह और गुलजार सिंह - जागोवाल गांव के सन्दीप सिंह के पिता अमर सिंह ने 20 दिसंबर 2018 को जारी हुआ 59,532 रुपए का बिल दिखाते हुए बताया कि वह दलित वर्ग से सम्बन्धित है और एक बल्ब और एक पंखो का यह बिल है। अमरगढ़ बिजली दफ्तर में न जे.ई ने सुनी न ऐसडीओ ने बस कहते हैं बिल भरना ही पड़ेगा। 5 महीने हो गए कोई सुनवाई नहीं है।
जागोवाल (अमरगढ़) के ही गुलजार सिंह ने 20,675 रुपए का 20 दिसंबर 2018 को आया बिल दिखाते हुए बताया कि घर में 2 बल्ब और 2 पंखे हैं। दलित होने के नाते बिल माफ होना चाहिए था, परंतु कोई सुनवाई नहीं हो रही।
या रोटी खाऐंगे या बिल भरेंगे - नसीब सिंह (फ़ोटो फाइल नंबर - न्यूज फ़ोटो -3)
नसीब सिंह - आलोअर्ख गांव के लखविन्दर सिंह के बुजुर्ग पिता नसीब सिंह ने 175 यूनिट के लिए 2 महीने का 4830 रुपए का 9 दिसंबर 2018 को आया बिल दिखाते हुए कहा कि दैनिक वेतन लेने वाला परिवार हर दो महीने के बाद आता इतना भारी बिजली का बिल भर कर घर का चूल्हा नहीं चला सकता। घर में तीन कमरों में 4 बल्ब और 2 कूलर हैं। ठंड में तो कूलर और पंखा भी नहीं चलता।
बिल 32,300 रुपए, कहते हैं भरना ही पडऩा -कुलवंत फग्गूवाला (फोटो फाइल नंबर - न्यूज फ़ोटो -4)
कुलवंत फग्गूवाला - फग्गूवाला गांव के कुलवंत सिंह ने अपने पिता बलदेव सिंह के नाम पर 19 जनवरी 2019 को आया 32,300 रुपए का बिल दिखाते हुए बताया कि जुलाई 2018 को 613 यूनिट खप्त के लिए 1620 रुपए का बिल आया था। सितम्बर 2018 को 38,520 (419 यूनिट) बिल आया। 27 नवंबर 2018 को 8600 रुपए की एक किश्त भरी और जनवरी 2019 में 32,300 (169 यूनिट) बिल आ गया। जे.ई समेत सभी अफसरों के पास फरियाद कर ली परन्तु कोई सुनवाई नहीं। आम सा घर है, मीटर चैलेंज किया परंतु कोई रिपोर्ट नहीं दी। बस कहते भरना ही पड़ेगा।
भारतीय किसान यूनियन ने बिजली के बिलों का मुद्दा विधान सभा और संसद में उठानो की मांग की
इस मौके भारतीय किसान यूनियन (राजेवाल) की जिला संगरूर के सीनियर मीत प्रधान कश्मीर सिंह घराचों के नेतृत्व में वफद ने भगवंत मान को मांग पत्र दे कर बिजली के मुद्दे उठाए। उन्होंने बिजली के महंगे बिलों का मुद्दा विधान सभा और संसद में उठाने की मांग की। बिजली के बिल 2 महीने की बजाए महीनावार करने का मुद्दा उठाया क्योंकि 2 महीने दौरान यूनिटों का स्लैब पार होने के कारण बिजली ओर महंगी हो जाती है।
60 रुपए प्रति यूनिट आ रहा है बिल
    इस मौके प्रेम सिंह कलौदी ने 256 यूनिट का 15239 रुपए का बिल दिखाया जो 60 रुपए प्रति यूनिट पड़ रहा है। इसी तरह बुद्ध सिंह की विधवा संती ने 8000 रुपए और सब्जी की रेहड़ी लगाते नाहर सिंह ने 2 कमरों के घर का 41,200 रुपए का बिल दिखाते हुए अपने दुख जाहिर किए। 

 

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