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2019 में इन चुनौतियों से पानी होगी निजात: रघुराम राजन

January 02, 2019 02:31 PM
नई दिल्ली. भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन और प्रख्यात अर्थशास्त्री तथा एमआईटी में इकनॉमिक्स के प्रोफेसर अभिजीत बनर्जी ने साल 2019 में भारत की आर्थिक रणनीति पर अपने विचार व्यक्त किए हैं। देश के मौजूदा हालात पर उन्होंने कहा है कि सरकार की भूमिका अहम होती है। सरकार की क्षमता असीम होती है। सरकारी नीति में स्थिरता जरूरी है, ताकि हमारे किसान और कंपनियां बेहतर प्लान कर सकें और बाजार भी बेहद प्रभावी भूमिका निभा सके। दोनों अर्थशास्त्रियों के मुताबिक, साल 2019 में आर्थिक चुनौतियों से पार पाने के लिए भारत को इन सात मुद्दों पर ध्यान देना होगा। 
1. राजकोषीय घाटा बड़ा मुद्दा 
राज्यों और केंद्र सरकार के व्यापक राजकोषीय घाटे से निजी निवेश के लिए कुछ खास नहीं बचता है। हमारा उद्देश्य वित्तीय दायित्व और बजट प्रबंधन कानून (एफआरबीएमए) का पालन करते हुए घाटे को 2023 तक जीडीपी के पांच फीसदी तक होना चाहिए। लेकिन इसे हमें क्रिएटिव अकाउंटिंग या आॅफ बैलेंस-शीट के जरिये नहीं, बल्कि राजस्व में बढ़ोतरी और बेहतर खर्च के जरिये हासिल करना चाहिए। 
 2. तीन सेक्टरों का बड़ा संकट 
अतीत में सरकार द्वारा समय-समय पर हस्तक्षेप के बावजूद, देश में मौजूदा समय में तीन सेक्टर संकट से गुजर रहे हैं, जिनमें कृषि, बिजली और बैंकिंग शामिल हैं और कभी-कभी इन हस्तक्षेपों के कारण भी संकट बढ़ा है। उदाहरण के लिए, समय-समय पर निर्यात पर पाबंदी और खाद्य मुद्रास्फीति को कम रखने के लिए भारी मात्रा में आयात ने व्यापार की शर्तों को कृषि के खिलाफ कर दिया है, जबकि इससे किसानों की प्लान करने की क्षमता घटी है। किसानों को सस्ती या मुफ्त बिजली से जलस्तर घटकर चरम पर पहुंच गया है। 
 किसानों को अब मदद की जरूरत है। हालांकि ऋणमाफी, बिना पर्याप्त खरीद व्यवस्था के एमएसपी में बढ़ोतरी और इनपुट प्राइस सब्सिडी ने हालत को और बदतर किया है। ऐसे में सरकार को नई प्रौद्योगिकी और सिंचाई में निवेश करने के साथ-साथ तेलंगाना का 'रयथू बंधु योजना' की तर्ज पर एकमुश्त रकम देने की दिशा में कदम उठाने की जरूरत है। इसी तरह, बिजली वितरण कंपनियों की समस्या का हल बेहतर मीटरिंग तथा बिजली उत्पादन के लिए स्वच्छ प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल और वितरण का विकेंद्रीकरण है। 
 3. बेहतर कारोबारी माहौल की जरूरत 
हमें उन लोगों के रोजगारों के सृजन के लिए एक बेहतर कारोबारी माहौल बनाने की जरूरत है, जो कृषि कार्य, शहरी स्कूल या हमारे विश्वविद्यालयों से निकलते हैं या फिर संकट से जूझ रहे निर्यात क्षेत्र में जान फूंकने की जरूरत है। इसके लिए एक सेंटर-स्टेट प्रॉडक्टिविटी काउंसिल मददगार साबित हो सकता है। 
 4. शक्तियों का विकेंद्रीकरण जरूरी 
सतत विकास के लिए एक बेहद प्रभावी लेकिन सहूलियत वाले नियम-कानूनों की जरूरत है। हमारे शहरों में भीड़ बढ़ रही है और जलवायु परिवर्तन हम पर निर्भर करता है। नगरपालिकाओं को इन चुनौतियों से निपटने के लिए फंडिंग और शक्तियों की जरूरत है, जो अधिक से अधिक विकेंद्रीकरण से संभव है। 
 5. कैश ट्रांसफर की ओर बढ़ाएं कदम 
सरकार को जनता को बेनिफिट्स देना है, लेकिन इसे प्रदान करने का जरिया हमेशा अनुकूल नहीं होता। बेनिफिट्स देने में आने वाली बाधाओं को दूर करने के लिए सरकार को कैश ट्रांसफर की ओर बढ़ना चाहिए। इसके पहले कदम के तहत, सरकार के सब्सिडी कार्यक्रम के तमाम लाभार्थियों के पास कैश ट्रांसफर और बेनिफिट्स इन काइंड के बीच विकल्प होना चाहिए। 
 6. अधिक कौशलयुक्त लोगों की जरूरत 
हमें सरकार में अधिक से अधिक कौशल वाले लोंगों की जरूरत है। ऐसे लोगों की जरूरत उच्च स्तर पर तकनीकी क्षेत्रों जैसे डिजिटाइजेशन, व्यापार समझौता और एन्वायरन्मेंट रेग्युलेशन के अलावा, बड़े शहरों के बाहर छोटे स्तर पर भी है। 
 7. स्वास्थ्य क्षेत्र में बहुत है मसला 
हमें आने वाले समय में गैर-संक्रामक रोगों की बड़ी समस्या का समाधान करने की जरूरत है, जिसके लिए फ्रंटलाइन प्रोवाइडर्स की मदद की जरूरत होगी। ऐसे अधिकांश लोगों के पास औपचारिक तौर पर योग्यता नहीं होती, लेकिन इस बात के सबूत हैं कि उन्हें प्रशिक्षित कर उनसे बेहतर काम लिया जा सकता है। चूंकि उनके पास मरीजों की पहुंच होती है, इसलिए स्वास्थ्य व्यवस्था को उन्हें नजरअंदाज करने के बजाय उनका बेहतर तरीके से इस्तेमाल करने की जरूरत है। 
 

 

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